पत्नी कोरबा में, पति का 400 KM दूर कोंडागांव तबादला; छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लगाई रोक

admin  - News & Entertainment
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति-पत्नी की अलग-अलग जिलों में पदस्थापना से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार तंवर के कोरबा से कोंडागांव जिले के माकड़ी किए गए तबादले पर रोक लगा दी है। उनकी पत्नी कोरबा जिले के दीपका में पटवारी के पद पर पदस्थ हैं।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने तबादला आदेश के साथ उसी दिन जारी कार्यमुक्ति आदेश पर भी रोक लगाई है। यह रोक राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के तहत गठित समिति के निर्णय तक प्रभावी रहेगी।

400 किलोमीटर दूर किया गया था तबादला

याचिकाकर्ता कमलेश कुमार तंवर ने हाई कोर्ट में बताया कि वे सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें कोरबा में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इसी बीच 3 नवंबर 2026 को उनका तबादला कोरबा से करीब 400 किलोमीटर दूर कोंडागांव जिले के माकड़ी कर दिया गया। खास बात यह रही कि तबादला आदेश जारी होने के दिन ही उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया।

स्थानांतरण नीति का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी पत्नी भी शासकीय कर्मचारी हैं और दीपका, कोरबा में पटवारी के पद पर पदस्थ हैं। राज्य की स्थानांतरण नीति की कंडिका 3.13 में पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर यथासंभव एक ही स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कोरबा में जितेंद्र कुमार साहू को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को लेकर कमलेश तंवर ने पहले ही हाई कोर्ट में अलग याचिका दायर की थी। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने उसी दिन कार्यमुक्त किए जाने और स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित समय का पालन नहीं होने पर भी सवाल उठाए।

समिति 20 दिन में करेगी फैसला

राज्य सरकार की ओर से तबादले को प्रशासनिक आवश्यकता बताते हुए याचिका का विरोध किया गया। शासन ने कहा कि पति-पत्नी की अलग-अलग पदस्थापना से जुड़ी शिकायत पर स्थानांतरण नीति की कंडिका 8 के तहत गठित समिति के समक्ष अभ्यावेदन दिया जा सकता है।

इस पर हाई कोर्ट ने कमलेश तंवर को आदेश की तारीख से सात दिन के भीतर समिति के सामने अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। समिति को अभ्यावेदन प्राप्त होने के 20 दिन के भीतर नियमानुसार निर्णय लेना होगा।

कोर्ट ने समिति के फैसले तक तबादला और कार्यमुक्ति आदेश पर रोक लगाते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।

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