इंदौर में जलसंकट की आशंका, सूखे बोरिंग तो रोज 200 एमएलडी पानी की कमी कैसे होगी पूरी?

admin  - News & Entertainment
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इंदौर। अल्पवर्षा के चलते इंदौर में आने वाले महीनों में जलसंकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। शहर के कई तालाब सूखने की कगार पर हैं। इन तालाबों से आसपास के इलाकों में भूजल स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। ऐसे में इनके सूखने से बोरिंग पर निर्भर कॉलोनियों की परेशानी बढ़ सकती है।

शहर में करीब 1.30 लाख बोरिंग

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इंदौर में लगभग 1.30 लाख बोरिंग हैं, जिनसे रोज करीब 200 एमएलडी पानी मिलता है। शहर के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं है और कई कॉलोनियां बोरिंग पर निर्भर हैं। यदि भूजल स्तर गिरने से बोरिंग सूखते हैं, तो इन इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल शहर को नर्मदा से करीब 430 एमएलडी और यशवंत सागर से लगभग 30 एमएलडी पानी मिलता है। कुल 460 एमएलडी पानी 107 टंकियों के जरिए शहर के करीब 70 प्रतिशत हिस्से तक पहुंचाया जाता है।

900 टैंकरों की जरूरत का अनुमान

पिछली गर्मियों में जलापूर्ति बनाए रखने के लिए नगर निगम को 700 से ज्यादा टैंकर लगाने पड़े थे। इस बार जरूरत बढ़कर 900 से अधिक टैंकरों तक पहुंचने का अनुमान है। निगम 100 नए टैंकर खरीदने की तैयारी कर रहा है।

इसके अलावा गोंदवले धाम, आजाद नगर, यूनिवर्सिटी परिसर और नवलखा में बन रही चार पानी की टंकियों का काम तेजी से पूरा करने की योजना है। फलबाग में करीब 30 एमएलडी क्षमता का संपवेल भी तैयार किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर पानी का भंडारण किया जा सके।

महापौर ने मांगा 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है। उन्होंने यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने तथा नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के जरिए पानी उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

महापौर के मुताबिक, निगम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। दिसंबर के अंत तक जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने और जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने का लक्ष्य रखा गया है।

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