रायपुर : में पुलिस महानिदेशक पद को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब खत्म होने की ओर है। राज्य में प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहे इस पद पर जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और संघ लोक सेवा आयोग के नोटिस के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी दिखानी शुरू कर दी है।
दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मुकाबला
डीजीपी पद की दौड़ में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रमुख रूप से सामने हैं। इनमें 1992 बैच के अरुण देव गौतम और 1994 बैच के हिमांशु गुप्ता शामिल हैं। प्रशासनिक हलकों में अरुण देव गौतम को इस पद के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
यूपीएससी के नोटिस ने बढ़ाई सरकार की जिम्मेदारी
संघ लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि अब तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी राज्य में प्रभारी डीजीपी की व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दबाव
डीजीपी नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट दिशा निर्देश दे चुका है। ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार’ मामले में अदालत ने तय प्रक्रिया के तहत नियुक्ति और न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित करने को कहा था। हाल ही में ‘टी धंगोपल राव बनाम यूपीएससी’ मामले की सुनवाई में भी अदालत ने देरी पर सख्त टिप्पणी करते हुए जवाबदेही तय करने की बात कही थी।
यूपीएससी पैनल में दो नाम
13 मई 2025 को यूपीएससी ने राज्य सरकार को दो वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल भेजा था। आमतौर पर तीन नाम भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार पात्र अधिकारियों की संख्या सीमित होने के कारण केवल दो नाम ही शामिल किए गए। पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के सेवानिवृत्त होने के बाद अरुण देव गौतम को प्रभारी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अरुण देव गौतम का प्रोफाइल
अरुण देव गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उन्होंने उच्च शिक्षा के बाद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर 1992 बैच में आईपीएस सेवा जॉइन की। उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक जैसे सम्मान मिल चुके हैं।
छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्होंने राज्य कैडर चुना और कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी तैनाती और अनुभव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
तय प्रक्रिया के तहत होगी नियुक्ति
नियमों के अनुसार डीजीपी बनने के लिए न्यूनतम सेवा अवधि तय है और नियुक्ति यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल में से वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर की जाती है। साथ ही चयनित अधिकारी को कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल देना अनिवार्य होता है।
जल्द हो सकती है आधिकारिक घोषणा
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों और यूपीएससी की सिफारिशों के अनुरूप जल्द ही स्थायी डीजीपी के नाम की घोषणा कर सकती है।
