एवरेस्ट पर छत्तीसगढ़ की बेटी का परचम, लेकिन जीत के बीच टूटा दर्द; अमिता श्रीवास ने बयां किया खौफनाक अनुभव

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जांजगीर-चांपा : बेटी अमिता श्रीवास ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम रोशन कर दिया है। 22 मई को उन्होंने लगभग 8,848 मीटर ऊंचाई पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया, लेकिन यह सफलता उनके लिए बेहद दर्दनाक अनुभवों से भरी रही।

एवरेस्ट पर जीत, लेकिन दो साथियों की मौत का दर्द

अमिता ने बताया कि उनके साथ दो साथी भी इस अभियान में शामिल थे। करीब 40 दिनों तक सभी ने साथ यात्रा की, लेकिन अचानक मौसम बिगड़ने और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनके दोनों साथियों ने दम तोड़ दिया।उन्होंने भावुक होकर बताया कि यह पल उनके जीवन का सबसे भयावह अनुभव था, जिसे वह कभी भूल नहीं सकतीं।

ऑक्सीजन की कमी से बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में इलाज जारी

एवरेस्ट से लौटते समय अमिता की तबीयत भी गंभीर रूप से बिगड़ गई। उन्हें ऑक्सीजन की कमी की समस्या हुई, जिसके बाद उन्हें काठमांडू के अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज वहीं चल रहा है।

गरीब परिवार से निकलकर एवरेस्ट तक का सफर

अमिता ने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनके पिता पहले सैलून चलाते थे, भाई रायपुर में नौकरी करते हैं और दूसरा भाई वेल्डिंग का काम करता है।उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण जैसे महंगे खेल को अपनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मदद और समर्थन से उनका सपना पूरा हो सका।

सरकार की मदद बनी सहारा

अमिता के अनुसार, ट्रेनिंग से लेकर अस्पताल में भर्ती होने तक सरकार और प्रशासन ने लगातार सहयोग किया। जिला कलेक्टर भी उनकी स्थिति की नियमित जानकारी लेते रहे।

बेटियों के लिए संदेश

अमिता ने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें।

किलिमंजारो से एवरेस्ट तक का सफर

गौरतलब है कि अमिता श्रीवास इससे पहले अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी भी फतह कर चुकी हैं। अब एवरेस्ट पर उनकी यह उपलब्धि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला रही है।

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