रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान लाइफ केयर लिमिटेड को सौंपे जाने के निर्णय पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी 14 अप्रैल से जगदलपुर से सेवाएं शुरू करने जा रही है, जबकि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं है।
बिना टेंडर काम देने पर उठे सवाल
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, सामान्य वित्तीय नियमावली 2017 और केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा निर्देश स्पष्ट करते हैं कि किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को बिना निविदा सीधे कार्य सौंपना सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा दोनों की अनदेखी की गई है।
क्या कहते हैं नियम, समझिए प्रमुख बिंदु
प्रतिस्पर्धा जरूरी
GFR 2017 के नियम 133 के तहत यदि किसी PSU को काम देना हो, तो कई योग्य संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा कराना अनिवार्य होता है। चयन सेवा शुल्क के आधार पर होना चाहिए।
किन हालात में मिल सकता है सीधा काम
कुछ विशेष परिस्थितियों में ही बिना टेंडर कार्य दिया जा सकता है
- आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा
- जब संबंधित कार्य के लिए केवल एक ही संस्था उपलब्ध हो
- बार बार टेंडर असफल होने की स्थिति
CVC के सख्त निर्देश
केंद्रीय सतर्कता आयोग के अनुसार नामांकन आधार पर ठेका देना समान अवसर के अधिकार के खिलाफ माना जा सकता है, क्योंकि इससे अन्य योग्य संस्थाओं को मौका नहीं मिलता।
बैक टू बैक अनुबंध पर रोक
PSU को दिया गया काम वह सीधे किसी निजी एजेंसी को बिना प्रक्रिया के नहीं सौंप सकता।
संसाधनों और कर्मचारियों पर संकट की आशंका
डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस निर्णय से राज्य के अस्पतालों में पहले से उपलब्ध मशीनों और प्रशिक्षित स्टाफ के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अब तक किसी प्रकार का गैप एनालिसिस नहीं किया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मौजूदा सुविधाएं पर्याप्त हैं या नहीं।
लागत और पारदर्शिता पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने पूछा कि
- HLL को कितनी फीस दी जाएगी
- कंपनी खुद काम करेगी या किसी निजी एजेंसी को देगी
- जांच की दरें क्या होंगी
उनके अनुसार, इन सभी बिंदुओं पर अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है।
पुराने मामलों का भी दिया हवाला
डॉ. गुप्ता ने कहा कि इससे पहले डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बिल्डिंग सर्वे का कार्य भी HLL को नामांकन के आधार पर दिया गया था। उन्होंने आशंका जताई कि यह मामला भी उसी तरह विवादों में घिर सकता है।
सरकार से जवाब की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि जब न तो कोई आपात स्थिति है और न ही टेंडर प्रक्रिया विफल हुई है, तो फिर बिना निविदा इस तरह का निर्णय क्यों लिया गया।
