श्रीनगर से जुड़े लद्दाख के प्रमुख सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि संवाद की रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे क्षेत्र के लोगों में निराशा बढ़ रही है और लेह और कारगिल के बीच सामाजिक दूरी को लेकर आशंकाएं भी गहराने लगी हैं।
बातचीत में देरी से बढ़ रही निराशा
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लंबे समय से बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है। उनके अनुसार पिछली बैठक के बाद ढाई महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि संवाद की धीमी गति से लोगों के बीच अविश्वास की स्थिति बन सकती है, जिसे समय रहते रोकने की जरूरत है।
समुदायों के बीच दूरी बढ़ने की आशंका
वांगचुक ने चेतावनी दी कि यदि बातचीत में देरी जारी रहती है तो इसका फायदा कुछ ऐसे तत्व उठा सकते हैं जो लेह और कारगिल, तथा बौद्ध और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी पैदा करना चाहते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
लद्दाख में लंबे समय से जारी है आंदोलन
लद्दाख में लंबे समय से लद्दाख एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस राज्य का दर्जा देने, छठी अनुसूची में शामिल करने और भूमि व सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
इन मांगों को लेकर पिछले वर्षों में कई दौर के आंदोलन और बातचीत हो चुकी है, लेकिन समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।
हिंसा और तनाव की पृष्ठभूमि
सितंबर 2025 में हुए आंदोलन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई थी, जिसमें लेह में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना सामने आई थी।
उस दौरान सरकारी संपत्तियों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था, जिसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए थे।
हिरासत और रिहाई के बाद फिर उठी आवाज
सोनम वांगचुक को उस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा किया गया। अब एक बार फिर उन्होंने सरकार से अपील करते हुए बातचीत को तेज करने और लद्दाख के मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
समाधान की उम्मीद बरकरार
वर्तमान स्थिति में सभी की नजर केंद्र सरकार और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही संवाद प्रक्रिया को गति मिलेगी और क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
