Damoh Collector: दमोह में जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का एक ऐसा मानवीय और संवेदनशील रूप सामने आया है, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जो समय निकाला, वह समाज के प्रति उनकी संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
रविवार की छुट्टी को बनाया सेवा का दिन
7 जून, रविवार को जब आमतौर पर लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, उसी दिन कलेक्टर प्रताप नारायण यादव अपनी बेटी के साथ शहर के वृद्धाश्रम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों के बीच समय बिताया और उनसे आत्मीयता के साथ बातचीत की।
बुजुर्गों के साथ बैठकर जाना हालचाल
वृद्धाश्रम में कलेक्टर ने बुजुर्गों का हालचाल जाना और उनके अनुभवों को ध्यान से सुना। इस मुलाकात के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया, जहां कई बुजुर्गों की आंखें भी नम हो गईं।
अपनापन और संवेदना से जीता दिल
कलेक्टर का यह व्यवहार केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि उसमें अपनापन और मानवीय संवेदना साफ झलक रही थी। उनकी यह पहल बताती है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी मानवीय रिश्तों को जिंदा रखा जा सकता है।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
यह घटना एक प्रेरणादायक संदेश देती है कि सेवा केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ जुड़कर भी की जा सकती है। कलेक्टर की यह पहल अधिकारियों और आम लोगों दोनों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।
