भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने निगम, मंडल, बोर्ड और आयोगों में हाल ही में नियुक्त किए गए 70 से अधिक अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के लिए जवाबदेही तय करने की तैयारी कर ली है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इन नियुक्तियों को केवल राजनीतिक संतुलन का माध्यम नहीं माना जाएगा, बल्कि उनके कार्यों का नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा। प्रत्येक छह माह में प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार कर उनकी सक्रियता, जनसंपर्क, जनहित कार्यों और संगठनात्मक योगदान का आकलन किया जाएगा।
कामकाज और जनसेवा दोनों पर रहेगी नजर
नई व्यवस्था के तहत संबंधित संस्थाओं के प्रशासनिक कार्यों, वित्तीय प्रबंधन, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की शिकायतों के समाधान की समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पदाधिकारी केवल पद संभालने तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री ने दिए स्पष्ट संकेत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कहा था कि सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में योगदान दें। उन्होंने जनसंपर्क बढ़ाने और योजनाओं की निगरानी पर विशेष जोर दिया था।
जनता और शासन के बीच बनेंगे मजबूत सेतु
सरकार का मानना है कि निगम, मंडल और बोर्ड केवल प्रशासनिक संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि जनता और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। इसी सोच के तहत नियुक्ति के तुरंत बाद पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देकर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया है।
छह माह बाद तय होगी कार्यक्षमता
आने वाले छह महीने इन पदाधिकारियों के लिए अहम साबित होंगे। इस अवधि में उनके कार्यों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि वे सरकार और संगठन की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरे हैं।
निकाय और विधानसभा चुनावों में भी निभानी होगी भूमिका
इन पदाधिकारियों को केवल विभागीय जिम्मेदारियां ही नहीं, बल्कि आगामी नगरीय निकाय चुनावों और वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पदाधिकारियों पर रहेगी।
गुटबाजी कम करने की रणनीति पर जोर
सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन ने कई पदाधिकारियों को उनके गृह जिलों और पसंदीदा विधानसभा क्षेत्रों से अलग जिम्मेदारियां देने की रणनीति अपनाई है। पार्टी का मानना है कि इससे स्थानीय गुटबाजी कम होगी और संगठनात्मक मजबूती बढ़ेगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जहां पिछले चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।
प्रदर्शन ही तय करेगा भविष्य
सरकार और संगठन दोनों की निगाह अब इन नियुक्तियों पर टिकी हुई है। छह माह बाद तैयार होने वाला मूल्यांकन रिपोर्ट कार्ड यह तय करेगा कि कौन पदाधिकारी अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन कर पाया और कौन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका।
