रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी दर्शकों का ध्यान खींच रही है। ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर आधारित इस प्रदर्शनी में वन संरक्षण, आदिवासी संस्कृति, वनोपज, बांस शिल्प और ग्रामीण आजीविका की झलक देखने को मिल रही है।
सोमवार को वन मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने वनोपज से बने उत्पादों का स्वाद लिया और वन धन विकास केंद्रों से जुड़े सदस्यों से उत्पादन व प्रसंस्करण की जानकारी ली। उन्होंने कोदो से बने बिस्कुट भी चखे। इस दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं से भी चर्चा की, जो अब वन धन केंद्रों के माध्यम से आजीविका से जुड़ी हैं।
प्रदर्शनी का मुख्य द्वार बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध ‘चेंदरू द्वार’ की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व का संदेश देता है।
विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और 2025 में 3.55 करोड़ पौधे रोपे गए। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी जमीन पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं।
प्रदर्शनी में बांस से बनी कलाकृतियां, शहद, आंवला, हर्बल उत्पाद और औषधीय पौधों की जानकारी भी उपलब्ध है। कांगेर घाटी और तीरथगढ़ जलप्रपात के मॉडल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
