उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 और महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों के पुनरुद्धार और विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजना तैयार की गई है। इसके तहत विश्व प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों का कायाकल्प किया जाएगा।
मंदिरों के पुनर्विकास पर उच्च स्तरीय बैठक
संभागायुक्त आशीष सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर उज्जैन रोशन कुमार सिंह भौतिक रूप से मौजूद रहे, जबकि कलेक्टर आगर मालवा सुश्री प्रीति यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुईं।
बैठक में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर सांदीपनि आश्रम, नवग्रह मंदिर, चौरासी महादेव मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर, मां भूखी माता मंदिर, मां गढ़कालिका मंदिर, सिद्धवट मंदिर और मां बगलामुखी माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के सुव्यवस्थित संचालन और पुनरुद्धार पर विस्तार से चर्चा की गई।
टेंपल बॉन्ड योजना की समय सीमा तय
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टेंपल बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया पंद्रह जुलाई तक पूरी कर ली जाए, ताकि इकतीस जुलाई तक इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया जा सके। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को तय समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक हजार एक सौ करोड़ की विकास योजना
बैठक के बाद संभागायुक्त आशीष सिंह ने जानकारी दी कि कुल एक हजार एक सौ करोड़ रुपये की राशि से ग्यारह प्रमुख मंदिरों का विकास किया जाएगा।
इसमें दो सौ करोड़ रुपये टेंपल बॉन्ड के माध्यम से, दो सौ पचहत्तर करोड़ रुपये अर्बन चैलेंज फंड से और छह सौ पच्चीस करोड़ रुपये बैंकों के माध्यम से जुटाए जाएंगे।
दस साल के लिए जारी होंगे टेंपल बॉन्ड
जानकारी के अनुसार टेंपल बॉन्ड की अवधि दस वर्षों की होगी। इस योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना, मंदिरों का आधुनिकीकरण करना और सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन की धार्मिक संरचना को भव्य स्वरूप देना है।
