नई दिल्ली : 16 अप्रैल से शुरू होने जा रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस सत्र में केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
जदयू ने सांसदों को अनिवार्य उपस्थिति का निर्देश
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल जनता दल यूनाइटेड ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी सांसद 16 से 18 अप्रैल तक पूरे समय सदन में उपस्थित रहें और सरकार के पक्ष का समर्थन करें।
जदयू के लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 4 सांसद हैं, जिन्हें विशेष सत्र के दौरान अनिवार्य रूप से संसद में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष सत्र में अहम विधायी कार्यों पर चर्चा
पार्टी की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि इस दौरान कुछ बेहद महत्वपूर्ण विधायी कार्य सदन में पेश और पारित किए जाएंगे। इसी कारण सभी सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई है।
भाजपा ने भी जारी किया व्हिप, सख्त उपस्थिति के आदेश
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने सभी सांसदों के लिए तीन लाइन व्हिप जारी किया था। इसमें केंद्रीय मंत्रियों सहित सभी सदस्यों को 16 से 18 अप्रैल तक सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा ने साफ कहा है कि इन तीन दिनों में किसी भी तरह की छुट्टी मंजूर नहीं होगी और सभी सदस्यों को सदन में अपनी निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्रित सत्र
सूत्रों के अनुसार इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाना है, जिसे लेकर सरकार और सहयोगी दलों ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। इसे संसद के एक ऐतिहासिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
सियासी सरगर्मी बढ़ी
सत्र से पहले दोनों प्रमुख दलों के व्हिप जारी होने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संसद में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या यह सत्र किसी बड़े बदलाव की दिशा तय करता है।
