राहुल गांधी केस में नया मोड़… इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR आदेश पर लगाई रोक…नोटिस प्रक्रिया को बताया जरूरी

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नई दिल्ली : से जुड़े इस हाई प्रोफाइल मामले में Rahul Gandhi को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कथित दोहरी नागरिकता मामले में पहले दिए गए एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।कोर्ट ने साफ कहा कि बिना संबंधित पक्ष को नोटिस दिए इस तरह का आदेश देना उचित नहीं है। इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया पर नजरें टिक गई हैं।

अपने ही आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक, कानूनी प्रावधानों पर किया पुनर्विचार

लखनऊ बेंच ने बताया कि पहले ओपन कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन आदेश के औपचारिक रूप से जारी होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने पुराने कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया।इसके बाद अदालत ने अपने ही आदेश पर रोक लगाने का फैसला लिया, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।

2014 के फैसले का हवाला, नोटिस देना बताया अनिवार्य

अदालत ने वर्ष 2014 के पूर्ण पीठ के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में एफआईआर की मांग खारिज होती है और उसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की जाती है, तो प्रस्तावित आरोपी को नोटिस देना जरूरी है।इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस के आगे की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

सुनवाई के दौरान उठा था नोटिस का मुद्दा, अब बना फैसला का आधार

सुनवाई के दौरान अदालत ने याची और सरकारी पक्ष से पूछा था कि क्या विपक्षी पक्ष को नोटिस देना जरूरी है। उस समय वकीलों ने इसकी आवश्यकता नहीं बताई थी, जिसके बाद एफआईआर का आदेश सुनाया गया।हालांकि बाद में अदालत ने इस पहलू पर पुनर्विचार करते हुए अपने फैसले में बदलाव किया।

गंभीर आरोपों से जुड़ा मामला, कई कानूनों के तहत जांच की मांग

यह पूरा मामला कर्नाटक के निवासी एस विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है। याचिका में राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट कानून के तहत आरोप लगाए गए हैं। साथ ही विस्तृत जांच की मांग की गई है।

अब 20 अप्रैल पर टिकी नजर, अगली सुनवाई में तय होगी दिशा

मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इससे पहले यह याचिका रायबरेली की विशेष अदालत में खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद इसे लखनऊ स्थानांतरित किया गया।हाईकोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब यह मामला कानूनी रूप से और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है, जहां अगली सुनवाई में इसकी दिशा तय होने की संभावना है।

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