मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और लगातार 48 दिनों से बने तनावपूर्ण हालात ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने का असर अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है।
भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर
रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी वैश्विक बाजार से आयात की जाती है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक सप्लाई होर्मुज रूट से होकर गुजरती है। इस मार्ग में बाधा आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा दबाव बढ़ गया है और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
उत्पादन और आपूर्ति दोनों पर पड़ा असर, कई जहाज फंसे
युद्ध के दौरान न केवल होर्मुज मार्ग प्रभावित हुआ है, बल्कि कई ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों की वजह से उत्पादन भी अस्थायी रूप से बाधित हुआ है। जानकारी के अनुसार करीब 15 जहाज अभी भी होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और अधिक धीमी हो गई है।
घरेलू बाजार में कीमतों पर असर, सिलेंडर महंगे हुए
सप्लाई बाधित होने के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगभग 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर में करीब 115 रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बने तनाव ने ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ा दी है।
भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हालात, राहत में लग सकता है लंबा समय
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात सामान्य होने में समय लग सकता है। उत्पादन और सप्लाई चेन को फिर से स्थिर होने में एक महीने से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है। हालांकि भारत सरकार की ओर से वैकल्पिक आपूर्ति और ऊर्जा प्रबंधन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
