CGMSC घोटाले में बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट से आरोपियों को मिली जमानत, सियासत में हलचल तेज

3 Min Read

रायपुर : में चर्चित छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड घोटाले में अहम मोड़ सामने आया है। मामले में आरोपी मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा और कमलकांत पाटनवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इससे पहले हाईकोर्ट उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

जेल से राहत, लेकिन आरोप बरकरार, जांच पर टिकी नजर
दोनों आरोपी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की एफआईआर के तहत रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। जमानत मिलने के बाद उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इससे आरोप खत्म नहीं होते। अब आगे की जांच और कोर्ट की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी।

660 करोड़ की संदिग्ध खरीदी ने खड़े किए बड़े सवाल
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब ऑडिट रिपोर्ट में करीब 660 करोड़ रुपये की संदिग्ध खरीदी का खुलासा हुआ। भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल यशवंत कुमार की रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान बिना बजट प्रावधान के बड़े पैमाने पर केमिकल और मेडिकल उपकरण खरीदे गए।

स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों की कमी के बावजूद सप्लाई जारी
ऑडिट में यह भी सामने आया कि 776 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरण भेजे गए, लेकिन 350 से अधिक केंद्र ऐसे थे जहां न तो प्रशिक्षित स्टाफ था और न ही जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध थीं। इसके बावजूद सप्लाई जारी रही, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

मिलीभगत के संकेत, सरकारी खजाने को नुकसान की आशंका
प्रारंभिक जांच में अधिकारियों और सप्लायर के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका जताई गई है। इस वजह से राज्य को बड़े आर्थिक नुकसान की बात कही जा रही है, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है।

राजनीतिक पारा चढ़ने के आसार, पुरानी सरकार पर फिर उठेंगे सवाल
यह घोटाला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान सामने आया था, ऐसे में जमानत के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है, जबकि सत्तापक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुटेगा।

आगे की राह: कानूनी प्रक्रिया और जांच तय करेगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में अगला चरण बेहद अहम है। कोर्ट में पेश होने वाले साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही तय करेगी कि आरोप कितने मजबूत हैं और अंतिम फैसला किस दिशा में जाएगा।

Share this Article