नई दिल्ली। अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने पारंपरिक लुक को लेकर सुर्खियों में हैं। संसद परिसर में उनकी हालिया मौजूदगी के दौरान पहनी गई साड़ी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह कोई साधारण परिधान नहीं, बल्कि करीब 800 साल पुरानी विरासत से जुड़ी कोडाली करुप्पुर साड़ी है, जिसे भारतीय हस्तकरघा कला का अनमोल नमूना माना जाता है।
इतिहास में दर्ज शाही पहचान
कोडाली करुप्पुर साड़ी की जड़ें तमिलनाडु के करुप्पुर क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती हैं। ऐतिहासिक रूप से यह साड़ी तंजावुर के शाही परिवारों, विशेषकर रानियों की पहली पसंद मानी जाती थी। अपनी बारीक कारीगरी और विशिष्ट डिजाइन के कारण यह लंबे समय तक केवल राजघरानों और विशिष्ट वर्ग तक सीमित रही।
हुनर और धैर्य का अद्भुत मेल
इस साड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक बुनाई और निर्माण प्रक्रिया है।
यह पूरी तरह हाथ से तैयार की जाती है, जिसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है। एक साड़ी को तैयार करने में कई महीने लग जाते हैं। इसकी बारीक डिजाइन और जरी बॉर्डर इसे शाही रूप प्रदान करते हैं। जटिल तकनीक के कारण हर साड़ी अपने आप में अलग और विशेष होती है।
विलुप्त होती कला को मिला नया जीवन
समय के साथ यह प्राचीन शिल्प धीरे-धीरे गुमनामी में जा रहा था, लेकिन हाल के वर्षों में इसे फिर से जीवित करने के प्रयास तेज हुए हैं। कंगना रनौत द्वारा इस साड़ी को सार्वजनिक मंच पर पहनना इस पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सादगी में दिखा रॉयल टच
इस खास अवसर पर कंगना ने बेज और ब्राउन शेड की साड़ी के साथ बेहद सादगीपूर्ण ब्लाउज पहना, जिसकी स्लीव्स पर मैचिंग बॉर्डर था। उनका यह लुक भारतीय परंपरा और शाही एलीगेंस का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने फैशन और संस्कृति दोनों को एक साथ मंच पर ला दिया।
