कभी सूखे से परेशान था हिवरे बाजार, आज खेती और डेयरी से बदली गांव की तस्वीर

admin  - News & Entertainment
2 Min Read

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले का हिवरे बाजार गांव जल संरक्षण, सामूहिक प्रयास और बेहतर कृषि प्रबंधन की मिसाल के तौर पर जाना जाता है। कभी पानी की कमी और गरीबी से जूझने वाले इस गांव में आज खेती और डेयरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं।

1990 के दशक में गांव में बारिश कम होने, पीने के पानी की किल्लत और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में लोग पलायन कर गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय करीब 80 प्रतिशत ग्रामीण गांव छोड़ चुके थे।

गांव में बदलाव की शुरुआत 1989 में हुई, जब पोपटराव पवार सरपंच बने। उनके नेतृत्व में ग्रामीणों ने पानी बचाने और गांव की समस्याओं का सामूहिक समाधान करने पर जोर दिया। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, श्रमदान और खेती में पानी के संतुलित इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई।

गांव में चराई पर नियंत्रण, पेड़ों की कटाई रोकने, नशामुक्ति और अधिक पानी लेने वाली फसलों को सीमित करने जैसे नियम भी अपनाए गए। पानी की उपलब्धता बेहतर होने के साथ खेती को बढ़ावा मिला और किसानों ने प्याज, संतरा, अमरूद तथा अंजीर जैसी फसलों की ओर रुख किया।

खेती के साथ डेयरी व्यवसाय भी गांव की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बना। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गांव में प्रतिदिन करीब 8,000 से 9,000 लीटर दूध का उत्पादन होता है।

गांव में पक्के मकान, सड़कें और सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित हुई हैं। बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बारिश के आंकड़े दर्ज करने जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं।

रिपोर्ट में गांव की प्रति व्यक्ति सालाना आय करीब 9 लाख रुपये बताई गई है। हिवरे बाजार की कहानी दिखाती है कि जल संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और संसाधनों के नियोजित इस्तेमाल से ग्रामीण विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

Share this Article