16 वर्षीय पीड़िता के गर्भपात मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…31 सप्ताह बाद अनुमति से इनकार, राज्य को दिए अहम निर्देश

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मध्य प्रदेश : हाई कोर्ट ने दुष्कर्म से गर्भवती हुई 16 वर्षीय नाबालिग के मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने 31 सप्ताह की गर्भावस्था को देखते हुए गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।यह मामला मंडला जिले के घुघरी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप

जानकारी के अनुसार, ग्राम बहरा निवासी एक युवक पर आरोप है कि उसने नाबालिग को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई। गर्भावस्था 24 सप्ताह की कानूनी सीमा से आगे निकल जाने के कारण मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

मेडिकल रिपोर्ट में सामने आई गंभीर स्थिति

सुनवाई के दौरान मंडला जिला अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सक समिति की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता 31 सप्ताह की गर्भवती है और उसका हीमोग्लोबिन स्तर 7.5 ग्राम पाया गया है, जो गंभीर एनीमिया को दर्शाता है।मेडिकल रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गर्भस्थ शिशु जीवित और स्वस्थ है। विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि इस स्थिति में गर्भपात कराना नाबालिग के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

सभी तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह निर्णय चिकित्सकीय और कानूनी दोनों दृष्टि से सुरक्षित नहीं है।

राज्य सरकार को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़िता को अस्पताल में भर्ती रखकर लगातार चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी उपलब्ध कराई जाए।साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

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