मुरैना/चंबल। मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम के तहत 99 घड़ियाल शावकों का सफल जन्म दर्ज किया गया है, वहीं दुर्लभ कछुआ प्रजाति के 18 शावकों को भी सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ा गया है।
देवरी हैचरी में तैयार हुआ नया जीवन, घड़ियाल संरक्षण में बड़ी सफलता
घड़ियाल पुनर्वास केंद्र देवरी हैचरी में कृत्रिम घोंसलों के माध्यम से यह सफलता हासिल हुई है। बरौली क्षेत्र से लाए गए अंडों से पहले चरण में 29 शावकों का जन्म हुआ, जबकि 23 मई 2026 को 70 और शावकों ने जन्म लिया। इस तरह कुल 99 घड़ियाल शावकों का सफल हैचिंग कार्य पूरा हुआ है।
वन विभाग के अनुसार अभी बाबू सिंह घेर क्षेत्र से लाए गए 95 अंडों से और शावकों के जन्म की संभावना बनी हुई है, जिससे यह संख्या आगे और बढ़ सकती है।
क्वारंटाइन में सुरक्षित रखे गए नवजात शावक
सभी नवजात घड़ियाल शावकों को हैचरी में बने क्वारंटाइन क्षेत्र में रखा गया है, जहां उनकी विशेष निगरानी और देखभाल की जा रही है। विशेषज्ञ लगातार उनके स्वास्थ्य और विकास पर नजर बनाए हुए हैं।
दुर्लभ कछुआ प्रजाति को भी मिला नया जीवन
इसी अभ्यारण्य के गेम रेंज अंबाह अंतर्गत उसेट घाट पर स्थित अस्थाई कछुआ हैचरी में भी बड़ी सफलता दर्ज की गई है। यहां अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति बाटागुर डोंगोंका के 18 शावकों ने जन्म लिया।
वन विभाग की टीम ने इन सभी शावकों को सुरक्षित रूप से चंबल नदी के प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया है।
चंबल की जैव विविधता को मिला नया सहारा
विशेषज्ञों के अनुसार बाटागुर डोंगोंका कछुआ प्रजाति अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में आती है और इसका संरक्षण चंबल क्षेत्र की जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वन विभाग का संरक्षण अभियान लगातार जारी
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घड़ियाल और दुर्लभ कछुआ प्रजातियों के संरक्षण के लिए लगातार निगरानी, हैचरी प्रबंधन और प्राकृतिक आवास संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह सफलता चंबल क्षेत्र में चल रहे संरक्षण प्रयासों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
