मध्य प्रदेश : मऊगंज जिले से पुलिस महकमे को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नेशनल हाईवे पर ट्रकों से अवैध वसूली का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है, जिससे विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
हाईवे पर रोककर 2 लाख की मांग का आरोप
जानकारी के अनुसार, 31 मई की शाम मऊगंज बायपास स्थित गैलेक्सी होटल के पास एक ट्रक को यातायात प्रभारी द्वारा रोके जाने का आरोप है। आरोप यह भी है कि वाहन चालक से दस्तावेजों की जांच के नाम पर दबाव बनाया गया और 2 लाख रुपये तक की मांग की गई।बताया जाता है कि बाद में सौदा कथित तौर पर 70 हजार रुपये में तय हुआ।
17 मिनट में तीन ट्रांजेक्शन, 60 हजार रुपये का दावा
आरोपों के अनुसार, पूरी कथित वसूली प्रक्रिया बेहद तेजी से हुई। दावा है कि 17 मिनट के भीतर फोन-पे के जरिए तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 60 हजार रुपये एक खाते में ट्रांसफर किए गए। इनमें 30 हजार, 20 हजार और 10 हजार रुपये की किस्तों का उल्लेख किया गया है।
सिंडिकेट और बिचौलियों की भूमिका पर सवाल
मामले में यह भी आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में एक पूर्व डाटा ऑपरेटर और एक पुलिस आरक्षक की भूमिका मध्यस्थ के रूप में रही। आरोपों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क कथित तौर पर अवैध वसूली की रकम को आगे ट्रांसफर और मैनेज करने में शामिल था।
अन्य ट्रकों से भी वसूली के आरोप
स्थानीय वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। दावा किया गया है कि अन्य ट्रेलरों से भी पैसे वसूले गए और बाद में चालान या छोटी रकम लेकर मामला निपटाया गया।
पुलिस अधिकारियों पर गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोप और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े दावे सही हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी अब तक अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं। इस मामले ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईजी के निर्देश पर शुरू हुई जांच
रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश के बाद मऊगंज पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सीडीआर और डिजिटल सबूतों पर टिकी जांच
जानकारों के मुताबिक, अब जांच का फोकस कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच पर है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला पुलिस विभाग के भीतर बड़े नेटवर्क को उजागर कर सकता है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल मामला जांच के शुरुआती चरण में है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने ला पाती हैं या नहीं।
