‘मोबाइल दीवार पर मार दो, डिजिटल अरेस्ट खत्म’, सुप्रीम कोर्ट में CJI ने जताई चिंता; 800 करोड़ के नुकसान का जिक्र

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नई दिल्ली। देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि पढ़े-लिखे लोग भी कैसे मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी की धमकी से डरकर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की, “मोबाइल दीवार पर मार दो, डिजिटल अरेस्ट खत्म हो जाएगा।”

CJI ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में किसी व्यक्ति को मोबाइल फोन के जरिए गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब लोग इस उम्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो वे अगली पीढ़ी को क्या सिखाएंगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी कथित गिरफ्तारी आदेश या कानूनी नोटिस की सत्यता संबंधित अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर जांची जा सकती है।

महिला से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी का मामला

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र एनएस नप्पिनई ने अदालत को बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों को रोकने के प्रयासों के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह एक महिला से करीब 2.5 करोड़ रुपये की ठगी का मामला भी बताया।

इस पर अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद डिजिटल अरेस्ट के मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है।

800 करोड़ रुपये के नुकसान का जिक्र

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस साल डिजिटल ठगी के कारण देश को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अदालत इस बात पर निर्देश देने पर विचार कर रही है कि यदि बैंक की लापरवाही के कारण साइबर ठगी होती है, तो संबंधित बैंक को पीड़ित को मुआवजा देना पड़ सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि खातों में असामान्य लेनदेन होने पर बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे सतर्कता बरतें और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचना दें। सुनवाई में म्यूल अकाउंट्स यानी ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खातों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

फिलहाल बैंक की जवाबदेही और मुआवजे को लेकर अदालत के संभावित निर्देशों पर सुनवाई जारी है।

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