भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की अहिवारा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का शुक्रवार दोपहर हैदराबाद में निधन हो गया। वे फेफड़ों में संक्रमण से जूझ रहे थे और पिछले करीब 22 दिनों से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती थे। इससे पहले रायपुर और दुर्ग में भी उनका उपचार कराया गया था। उनके निधन की खबर से अहिवारा क्षेत्र सहित प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा की पहचान एक शिक्षक, जनसेवक और सहज व्यवहार वाले नेता के रूप में थी। सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उन्होंने शिक्षा विभाग से की थी। जनवरी 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में सेवा शुरू करने के बाद उन्होंने करीब 34 वर्षों तक विद्यार्थियों को पढ़ाया। शिक्षक के रूप में लोकप्रियता के कारण लोग उन्हें ‘गुरुजी’ कहकर बुलाते थे।
2008 में बने अहिवारा के पहले विधायक
राजनीति में आने से पहले कोर्सेवाड़ा ने करीब 12 साल तक पूर्व सांसद ताराचंद साहू के निज सहायक के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा की राजनीति में कदम रखा।
वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद बनी अहिवारा विधानसभा सीट से वे पहली बार विधायक चुने गए। इस तरह उन्हें क्षेत्र का पहला विधायक बनने का गौरव मिला। वर्ष 2013 और 2018 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन वे संगठन से जुड़े रहे। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल की।
शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर दिया जोर
विधायक के रूप में उन्होंने अहिवारा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी। क्षेत्र में 451 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत होने की जानकारी भी सामने आई थी। नंदनी में केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था।
राज्य सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था।
राष्ट्रपति के हाथों मिला था सम्मान
कोर्सेवाड़ा को वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गुरु घासीदास सम्मान मिला था। वर्ष 2013 में उन्हें श्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। राजनीति में लंबा सफर तय करने के बावजूद उनकी पहचान सादगी और शालीनता से बनी रही।
उनके निधन से अहिवारा क्षेत्र ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिन्होंने शिक्षक के रूप में अपना सफर शुरू किया और जनसेवा को अपनी पहचान बनाया।
