मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ के बीच डॉक्टरों की अनुपस्थिति और गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा इलाज किए जाने के आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
डॉक्टर ड्यूटी से नदारद, मरीजों का इलाज दूसरों के भरोसे
अस्पताल में हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि मरीजों की भीड़ तो मौजूद थी, लेकिन कई डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे। आरोप है कि कुछ डॉक्टर अपने निजी क्लीनिकों में व्यस्त रहते हैं, जबकि अस्पताल में मरीज इलाज के लिए भटकते रहते हैं। इस दौरान डॉक्टरों के प्राइवेट असिस्टेंट और आउटसोर्स कर्मचारी मरीजों का इलाज करते नजर आए।
एक बेड पर दो-दो मरीज, भीषण गर्मी में बेहाल मरीज
वार्डों की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। कई बेड पर एक साथ दो-दो मरीजों को भर्ती किया गया है। भीषण गर्मी में दर्द से कराहते मरीज, स्ट्रेचर की कमी और परिजनों द्वारा मरीजों को कंधों पर उठाकर ले जाने जैसी तस्वीरें अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।
आउटसोर्स कर्मचारी कर रहे इंजेक्शन लगाने का काम
वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि मल्टी स्किल्ड ग्रुप-डी के आउटसोर्स कर्मचारी मरीजों को दवाइयां देने के साथ-साथ इंजेक्शन भी लगाते दिखाई दिए। जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी साफ-सफाई और बेडशीट बदलने की है, वही अब इलाज जैसे गंभीर काम करते नजर आ रहे हैं। इस स्थिति ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल
भोपाल से आए डिप्टी डायरेक्टर लालप्रणय सिंह के निरीक्षण के दौरान भी अस्पताल की खामियां उजागर हुईं। मरीजों और परिजनों ने अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। लोगों का कहना है कि कई जरूरी दवाएं, यहां तक कि टिटेनस इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है।
प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
अधिकारियों ने स्ट्रेचर और सुविधाओं की उपलब्धता का दावा किया, लेकिन मौके पर स्थिति इसके उलट नजर आई। मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार उन्हें निजी साधनों से इलाज के लिए ले जाना पड़ता है।
मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशिक्षित स्टाफ की जगह अन्य कर्मचारियों द्वारा इलाज करना न केवल नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है, बल्कि यह मरीजों की जान के लिए भी जोखिमपूर्ण माना जा रहा है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के संकेत दिए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई हुई है। अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन कितनी गंभीरता से जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।
