भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जहां इस पर आज सुनवाई सूचीबद्ध है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बनी सियासी उम्मीद का केंद्र
कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि शीर्ष अदालत से उसे राहत मिल सकती है। यह मामला इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इसका फैसला राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। पार्टी इसे अपने लिए एक निर्णायक कानूनी लड़ाई के रूप में देख रही है।
बीजेपी को निर्विरोध जीत का प्रमाणपत्र, कांग्रेस में बढ़ी नाराजगी
इसी बीच चुनाव आयोग ने राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया है और उन्हें प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी और तेज हो गई है।
दिल्ली में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन और राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी
इस पूरे विवाद को राजनीतिक स्तर पर मजबूती से उठाने के लिए कांग्रेस के विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग करने की घोषणा की है। हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति 12 और 13 जून को उत्तराखंड दौरे पर रहेंगी और देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी।
राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्मी
नामांकन रद्द, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और निर्विरोध चुनाव परिणाम ने मध्य प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।
आगे क्या होगा, टिकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर
इस पूरे मामले का अंतिम असर राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। अगर अदालत से कोई राहत मिलती है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ी जीत साबित हो सकती है, वहीं अन्यथा यह विवाद यहीं थम जाएगा।
