गुना में दूषित पानी बना बच्चों की बीमारी की वजह? डेढ़ दर्जन से अधिक मासूम अस्पताल में भर्ती, प्रशासन में मचा हड़कंप

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गुना। मध्य प्रदेश के गुना शहर में पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ गए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि एक दर्जन से अधिक परिवारों के 15 से ज्यादा बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

तीन-चार दिनों में बिगड़ी स्थिति, अस्पताल में बढ़े मरीज

स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में पिछले कई दिनों से गंदा और संदिग्ध पानी सप्लाई हो रहा है। इसके बाद बच्चों में अचानक पेट संबंधी बीमारियों के लक्षण दिखाई देने लगे। लगातार उल्टी-दस्त और तेज पेट दर्द के चलते परिजनों को बच्चों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने की खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

टूटी पाइपलाइनें बनीं संकट की बड़ी वजह?

वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से जलापूर्ति व्यवस्था की शिकायतें मिल रही थीं। उनका आरोप है कि कई जगह पेयजल पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे नालियों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर पहले भी संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यही लापरवाही अब बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है।

निजी इलाज से नहीं मिला फायदा, अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती

पीड़ित परिवारों ने बताया कि शुरुआत में बच्चों का निजी क्लीनिकों में इलाज कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। एक महिला ने बताया कि उसका बच्चा तीन दिन से अस्पताल में भर्ती है और लगातार उल्टी-दस्त से परेशान था।

वहीं दूसरी महिला ने बताया कि उसके बच्चे को पेट दर्द के साथ गंभीर संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाना पड़ा, जहां चिकित्सकों ने दूषित पानी को संभावित कारण बताया।

अस्पताल पहुंचे अधिकारी, शुरू हुई जांच

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और अन्य प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने भर्ती बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और चिकित्सकों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

साथ ही संबंधित विभागों की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर पानी के नमूने एकत्र करने, पाइपलाइनों की जांच करने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जलापूर्ति व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस घटना के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन सुधार और जल गुणवत्ता की निगरानी की जाती, तो इतने बच्चों को अस्पताल पहुंचने की नौबत नहीं आती।

फिलहाल सभी बीमार बच्चों का इलाज जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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