रायपुर : प्रदेश में इस बार गर्मी के मौसम में एसी और कूलर कारोबार उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ सका। अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा। नतीजतन एसी के दाम में करीब 20 फीसदी और कूलरों की कीमत में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबारियों के अनुसार महंगाई की वजह से इस सीजन में लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक का संभावित कारोबार प्रभावित हुआ है।
युद्ध का असर बाजार तक पहुंचा, बढ़ गई उत्पादन लागत
कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और युद्ध की परिस्थितियों का असर इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू उपकरणों के बाजार पर भी दिखाई दिया। एसी में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई। वहीं कूलरों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और कॉपर की कीमतों में वृद्धि ने इनके दाम बढ़ा दिए।
कूलर बाजार की रफ्तार थमी, अनुमान से एक लाख यूनिट कम बिकीं
गर्मी के मौसम में कूलर सबसे अधिक बिकने वाले उत्पादों में शामिल होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कूलरों की बिक्री लगातार बढ़ रही थी और इस बार पांच लाख से अधिक यूनिट बिकने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बाजार उस स्तर तक नहीं पहुंच सका और करीब चार लाख कूलरों की ही बिक्री हो पाई।
कारोबारियों के अनुसार यदि अनुमान के मुताबिक बिक्री होती तो लगभग 300 करोड़ रुपये का कारोबार संभव था, लेकिन वास्तविक बिक्री के कारण कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये तक सीमित रह गया। इस तरह केवल कूलर बाजार में ही लगभग 50 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ।
लोकल और ब्रांडेड कूलरों की मांग रही, लेकिन महंगाई बनी बाधा
बाजार में विंडो कूलरों और रूम कूलरों की मांग बनी रही। लोकल कूलर जहां अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प के रूप में लोकप्रिय रहे, वहीं ब्रांडेड मॉडल भी ग्राहकों की पसंद बने रहे। इसके बावजूद बढ़ी हुई कीमतों ने कई उपभोक्ताओं को खरीदारी टालने पर मजबूर कर दिया।
एसी की बिक्री भी उम्मीद से पीछे, 25 हजार यूनिट कम बिके
पिछले कुछ वर्षों में एसी की मांग तेजी से बढ़ी है और हर साल हजारों नए ग्राहक इस बाजार से जुड़ रहे हैं। इस बार करीब डेढ़ लाख एसी बिकने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन कीमतों में वृद्धि और मौसम की अनिश्चितता के कारण बिक्री लक्ष्य से काफी पीछे रह गई।
कारोबारी अनुमान के मुताबिक लगभग 25 हजार एसी कम बिके। यदि अनुमानित बिक्री होती तो करीब 700 करोड़ रुपये का कारोबार संभव था, लेकिन बिक्री में कमी के चलते लगभग 150 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
मई का बदला मौसम भी बना कारोबारियों के लिए चुनौती
कारोबारियों का मानना है कि केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि मई महीने में मौसम के उतार-चढ़ाव ने भी बिक्री पर असर डाला। कई क्षेत्रों में अपेक्षित गर्मी नहीं पड़ने से लोगों ने एसी खरीदने का निर्णय टाल दिया। हालांकि बाजार को अब भी उम्मीद है कि यदि जून में तापमान बढ़ता है तो अतिरिक्त 10 से 15 हजार एसी की बिक्री हो सकती है।
कॉपर और प्लास्टिक की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार एसी, कूलर और पंखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कॉपर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरे सेक्टर पर पड़ा है। पंखों की मांग पर भले ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन उनकी कीमतों में भी वृद्धि देखी गई है।
कारोबारियों ने जताई चिंता, 20 फीसदी तक प्रभावित हुआ बाजार
व्यापार जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि बढ़ती लागत और ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है। यही वजह है कि इस बार एसी और कूलर बाजार लगभग 20 फीसदी तक प्रभावित रहा। कारोबारियों को अब उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और कीमतों में स्थिरता बाजार को कुछ राहत दे सकती है।
