छत्तीसगढ़ की नई होम स्टे नीति से पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट, अब 9 कमरों तक की अनुमति…पंजीकरण रहेगा आजीवन मान्य

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छत्तीसगढ़ : सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से होम स्टे नीति 2025-30 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित नीति के तहत अब होम स्टे संचालकों को अधिक सुविधाएं और प्रशासनिक राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।

अब एक से नौ कमरों तक चला सकेंगे होम स्टे, पर्यटकों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं

नई व्यवस्था के अनुसार एक होम स्टे इकाई में न्यूनतम एक कमरे से लेकर अधिकतम नौ कमरों और 18 बिस्तरों तक की अनुमति दी गई है। इससे संचालकों को अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा और राज्य में आने वाले अधिक पर्यटकों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

बार-बार नवीनीकरण से राहत, पंजीकरण को मिली आजीवन वैधता

संशोधित नीति का सबसे बड़ा बदलाव पंजीकरण की अवधि को लेकर किया गया है। पहले होम स्टे का पंजीकरण केवल तीन वर्ष के लिए मान्य होता था, जिसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ता था। अब सरकार ने इसे आजीवन वैधता प्रदान कर दी है। इससे संचालकों को बार-बार की प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी और संचालन अधिक आसान हो सकेगा।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया, दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगा फायदा

राज्य सरकार ने पंजीकरण और प्रोत्साहन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का फैसला किया है। अब इच्छुक संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अधिकृत पोर्टल, वेबसाइट या मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

अब पुलिस अनुमोदन की अनिवार्यता खत्म

नई नीति के तहत होम स्टे शुरू करने के लिए पुलिस प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी और नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने में कम समय लगेगा। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

निवेशकों को मिलेगा सब्सिडी का विकल्प, बढ़ेगा निवेश

सरकार ने होम स्टे संचालकों और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन संबंधी प्रावधानों को भी अधिक आकर्षक बनाया है। पात्र इकाइयों को अब पूंजी निवेश सब्सिडी या ब्याज सब्सिडी में से किसी एक का लाभ लेने का विकल्प मिलेगा। इससे छोटे और मध्यम निवेशकों को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।

बस्तर से मैनपाट तक पर्यटन को मिलेगा नया आधार

राज्य में कई पर्यटन क्षेत्रों में पहले से होम स्टे अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • Bastar क्षेत्र में पर्यटकों को आदिवासी संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली से जोड़ने के लिए होम स्टे संचालित किए जा रहे हैं।
  • Surguja संभाग में प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
  • Jashpur में पर्यटन विकास के लिए विशेष पहल की गई है और ग्राम केरे को आदर्श होम स्टे ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • Mainpat में स्थानीय निवासियों को होम स्टे निर्माण और कमरों के विकास के लिए वित्तीय सहायता और अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्थानीय रोजगार और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि नई होम स्टे नीति से न केवल पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। स्थानीय संस्कृति, खानपान और परंपराओं से पर्यटकों को जोड़ने के साथ-साथ यह नीति राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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