मध्य प्रदेश : इंदौर में शुक्रवार को एक आवारा कुत्ते ने ऐसा आतंक मचाया कि लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। शहर के अरबिंदो अस्पताल से लेकर रेनसां कॉलेज तक करीब 8 किलोमीटर के इलाके में कुत्ते ने 42 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद घायलों का इलाज अरबिंदो अस्पताल और आसपास के क्लिनिक में कराया गया।
अस्पताल परिसर में सबसे पहले बरपाया कहर
जानकारी के अनुसार सुबह करीब 9 बजे कुत्ता अरबिंदो अस्पताल पहुंचा और वहां मौजूद 16 लोगों को काट लिया। इसके बाद वह कैंसर अस्पताल की ओर बढ़ा, जहां महिला डॉक्टरों, नर्सों, मरीजों, छात्रों, अटेंडर्स और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाया। अचानक हुए हमलों से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग खुद को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए।
गांवों से कॉलेज तक जारी रहा हमला
अस्पताल क्षेत्र से निकलने के बाद कुत्ता ग्राम बरदरी और रेवती रेंज पहुंचा, जहां उसने ग्रामीणों पर हमला किया। इसके बाद वह लगभग 8 किलोमीटर दूर रेनसां कॉलेज पहुंच गया और वहां भी तीन लोगों को घायल कर दिया। हमलों में घायल हुए कई लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई, जबकि 26 लोगों को अरबिंदो अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
नगर निगम की लापरवाही पर उठे सवाल
घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कुत्ते के हमलों की जानकारी कई बार नगर निगम कंट्रोल रूम को दी गई थी। डॉग स्क्वॉड भेजने की मांग भी की गई, लेकिन बताया गया कि टीम उस समय मल्हारगंज क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में व्यस्त थी। समय पर कार्रवाई नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो गई।
आवारा कुत्तों की समस्या पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना ने शहरों में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी प्रबंधन नहीं किया गया तो ऐसी घटनाएं आगे भी सामने आ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी चिंता
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि देशभर में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया था कि कुत्तों की आबादी के अनुरूप शेल्टर होम और अन्य सुविधाओं का विकास जरूरी है।
नसबंदी और टीकाकरण पर जोर, लेकिन अमल कमजोर
सर्वोच्च न्यायालय ने नगर निकायों को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अभियान तेज करने का निर्देश दिया था। साथ ही रेबीज संक्रमित कुत्तों को दोबारा सड़कों पर न छोड़ने और उन्हें शेल्टर होम में रखने की बात कही थी। हालांकि कई स्थानों पर इन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
