Bhopal : मेट्रो परियोजना अब एक नए चरण में पहुंचती दिख रही है। शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा को आसान और तेज बनाने के लिए मेट्रो नेटवर्क का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। योजना के मुताबिक फेज-1 और फेज-2 का काम अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कुछ प्रमुख रूटों पर मेट्रो सेवाएं 2028 तक शुरू होने की संभावना है।
सुभाष नगर से करौंद तक नया कॉरिडोर तैयार
फेज-2 के तहत सुभाष नगर से करौंद तक 9.6 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इस रूट में लगभग 5.38 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि शेष भाग अंडरग्राउंड बनाया जा रहा है।इस सेक्शन पर करीब 1540 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। इसमें दो स्टेशन भूमिगत होंगे, जबकि अन्य स्टेशन एलिवेटेड संरचना पर बनाए जा रहे हैं। यह रूट सुभाष नगर से शुरू होकर पुल बोगदा, ऐशबाग, रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टैंड, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला और कृषि उपज मंडी होते हुए करौंद तक पहुंचेगा।
फेज-3 से जुड़ेगा नया ट्रैफिक नेटवर्क
फेज-3 के तहत भदभदा चौराहे से रत्नागिरी चौराहे तक मेट्रो विस्तार की योजना है। यह कॉरिडोर 14.16 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें 13 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।इस परियोजना पर लगभग 1006 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। प्रस्तावित रूट में भदभदा चौराहा, डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रौशनपुरा, परेड ग्राउंड, गोविंदपुरा, पिपलानी और रत्नागिरी चौराहा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
शहर के यातायात में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद
इन दोनों चरणों के पूरा होने के बाद शहर के बड़े हिस्सों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। लाखों यात्रियों को इससे तेज और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा।
सरकार की प्राथमिकता: समय पर पूरा हो प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में Madhya Pradesh Metro Rail Corporation और इंदौर-भोपाल मेट्रो परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी चरणों का काम तय समय सीमा में पूरा किया जाए।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का सहयोग लिया जाए, ताकि इस सेवा का अधिक से अधिक लोग उपयोग कर सकें।
भोपाल की नई पहचान बनती मेट्रो लाइनें
मेट्रो विस्तार के साथ भोपाल का शहरी ढांचा तेजी से बदल रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल ट्रैफिक समस्या को कम करेगी, बल्कि शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिशीलता को भी नई दिशा दे सकती है।
