भोपाल : हाल ही में उद्घाटित हुई नगर निगम की नई बिल्डिंग अब शुरुआती दिनों में ही सवालों के घेरे में आ गई है। 73 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस इमारत का उद्घाटन 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था, लेकिन एक महीने के भीतर ही इसकी व्यवस्थाओं में खामियां सामने आने लगी हैं।
लिफ्ट में फंसी महिला कर्मचारी, 30 मिनट तक चला तनाव
तुलसीनगर स्थित इस नगर निगम भवन में बुधवार (3 जून) को एक महिला कर्मचारी लिफ्ट में फंस गईं। जानकारी के अनुसार, वह तीसरी मंजिल की ओर जा रही थीं, तभी अचानक बिजली गुल हो गई और लिफ्ट बीच में ही रुक गई।घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास मौजूद लोगों ने लिफ्ट खोलने की कोशिश शुरू कर दी।
तकनीकी टीम ने संभाला मोर्चा, सुरक्षित निकाला गया कर्मचारी
सूचना मिलते ही तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। लिफ्ट को रीसेट करने के बाद करीब 10 मिनट में महिला कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण यह स्थिति बनी।
बिना बैकअप सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी और नई इमारत में ऑटो बैकअप या पावर सपोर्ट सिस्टम पर्याप्त क्यों नहीं है। कर्मचारियों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।हालांकि अधिकारियों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस लिफ्ट का उपयोग करते हैं, और यह एक अचानक हुई बिजली कटौती की वजह से हुई घटना थी।
नई बिल्डिंग, पुरानी लापरवाही की आशंका
इस घटना ने नगर निगम की नई बिल्डिंग की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक भवनों में ऐसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होती हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में लिफ्ट सुरक्षित तरीके से काम कर सके या रुकने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित निकाला जा सके।फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की समीक्षा में जुटा है, लेकिन इस घटना ने भवन की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है।
