भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। करीब एक दशक से प्रमोशन प्रक्रिया अटकी होने के कारण हजारों कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ा है। अब इस मामले में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है, जिससे कर्मचारियों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं।
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए नए कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
पदोन्नति नियम 2025 पर फैसला अब भी लंबित
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पदोन्नति नियम 2025 को लेकर चल रही सुनवाई पूरी हो चुकी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 17 फरवरी 2026 को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हालांकि फैसला सुनाए जाने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के बाद स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से इस बहुप्रतीक्षित निर्णय का इंतजार जारी है।
कानूनी जानकारों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए निर्णयों का निपटारा 90 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन यह मामला अब भी लंबित है।
हाईकोर्ट से राहत मिली तो तुरंत शुरू हो सकते हैं प्रमोशन
यदि हाईकोर्ट पदोन्नति नियम 2025 को वैध ठहराता है, तो प्रदेश में रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सकता है। इससे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे लाभ मिलने की संभावना है।
क्या सरकार खुद खोल सकती है प्रमोशन का रास्ता?
मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सरकार केवल अदालत के फैसले का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि वैकल्पिक उपायों पर भी विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि सरकार हाईकोर्ट में पहले दिए गए अपने लिखित आश्वासन को वापस लेने की संभावना पर मंथन कर रही है। यदि ऐसा होता है तो प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग खुल सकता है।
प्रमोशन पर अदालत ने नहीं लगाई थी रोक
दिलचस्प बात यह है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कभी भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति पर प्रत्यक्ष रोक नहीं लगाई थी।
जब पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई थी, तब राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को लिखित आश्वासन दिया था कि अंतिम फैसला आने तक सरकार कोई पदोन्नति नहीं करेगी।
हाईकोर्ट ने इसी आश्वासन को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया था। यही कारण है कि वर्षों से प्रमोशन प्रक्रिया रुकी हुई है।
लाखों कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। कई कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं।
ऐसे में यदि सरकार अपने पुराने आश्वासन को वापस लेने का फैसला करती है या हाईकोर्ट का निर्णय कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो प्रदेश में बड़े पैमाने पर पदोन्नतियां शुरू हो सकती हैं।
अब दो संभावनाओं पर टिकी उम्मीद
मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए फिलहाल दो रास्ते सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
- हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियम 2025 को वैध घोषित किया जाना।
- सरकार द्वारा अदालत में दिया गया लिखित आश्वासन वापस लेना।
इन दोनों में से किसी एक कदम के बाद वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल लाखों कर्मचारियों की नजर सरकार और न्यायालय के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
