बंगाल कैबिनेट में बड़ा विस्तार, 35 नए मंत्रियों की एंट्री से बदला सत्ता का समीकरण, जानें किसे मिली कैबिनेट और राज्य मंत्री की जिम्मेदारी

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पश्चिम बंगाल: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार किया। कोलकाता स्थित नबन्ना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 35 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल ने सभी नवनियुक्त मंत्रियों को शपथ दिलाई।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पदभार ग्रहण किया था। सरकार गठन के लगभग 23 दिन बाद हुए इस विस्तार को प्रशासनिक मजबूती और राजनीतिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट में अनुभवी और नए चेहरों को मिला स्थान

मंत्रिमंडल विस्तार में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कैबिनेट मंत्री के रूप में दीपक बर्मन, तपस रॉय, डॉ. शंकर घोष, मनोज कुमार उरांव, अर्जुन सिंह, गौरी शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कल्याण चक्रवर्ती, अजय पोद्दार, शरद्वत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल और अनुप कुमार दास ने शपथ ग्रहण की।

इन नेताओं ने राज्य मंत्री पद की ली शपथ

राज्य मंत्री के रूप में जोएल मुर्मू, हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नदियार चंद बाउरी, विशाल लामा, शांतनु प्रमाणिक, मौमिता बिस्वास मिश्रा, उमेश राय, पूर्णिमा चक्रवर्ती, कौशिक चौधरी, भास्कर भट्टाचार्य, दिवाकर घरामी, अमिया किस्कू, कलिता माझी, गर्गी दास घोष, बिराज बिस्वास, दीपांकर जाना और सुमना सरकार को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।

स्वतंत्र प्रभार के साथ तीन राज्य मंत्री नियुक्त

सरकार ने डॉ. इंद्रनील खान, मालती रावा रॉय और राजेश महतो को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया है। इन नेताओं को अपने विभागों के संचालन की स्वतंत्र जिम्मेदारी दी जाएगी।

उत्तर और दक्षिण बंगाल को मिला प्रतिनिधित्व

मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल दोनों क्षेत्रों के विधायकों को जगह दी गई है। सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।

प्रशासनिक कार्यों में आएगी तेजी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार के कामकाज में और तेजी आएगी। विभागों का जल्द ही आवंटन किया जाएगा, जिसके बाद नए मंत्री अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे। पश्चिम बंगाल की नई सरकार के लिए यह विस्तार आगामी विकास योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को गति देने वाला माना जा रहा है।

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