भोपाल। मध्य प्रदेश में अवैध खनन पर रोक लगाने के सरकारी दावों के बीच राजधानी के नजदीक स्थित चंदेरी झील से चिंताजनक तस्वीरें सामने आई हैं। आरोप है कि झील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है और खनिज सामग्री को खुलेआम बाजार में बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
चंदेरी झील में दिन-रात जारी है खनन
मामला अचारपुरा-डोबरा मार्ग स्थित कुठार क्षेत्र की चंदेरी झील का बताया जा रहा है। आरोप है कि यहां पोकलेन मशीनों की मदद से लगातार खुदाई की जा रही है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि प्रतिदिन 50 से 60 ट्रक खनिज सामग्री निकाली जा रही है, जिसे बाद में विभिन्न शहरों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
गहरीकरण की आड़ में हो रहा खेल?
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि झील के गहरीकरण कार्य का लाभ उठाकर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झील के गहरीकरण का कार्य स्वीकृत है, लेकिन इस प्रक्रिया का दुरुपयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां चल रही हैं तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो पंचायत स्तर पर कोई ठोस आपत्ति दर्ज की गई और न ही खनिज विभाग की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई दिखाई दी है।
खनिज विभाग ने जांच का दिया आश्वासन
जिला खनिज अधिकारी एमएस रावत ने कहा है कि चंदेरी झील में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। उनके अनुसार अब तक अवैध खनन की कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में अवैध खनन और खनिज सामग्री की बिक्री की पुष्टि होती है तो संयुक्त टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों में बढ़ रही नाराजगी
लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। अब सभी की नजर प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
