कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद काकोली घोष ने पार्टी के जिला पदाधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वे जल्द सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं।
हालांकि अभी तक काकोली घोष की ओर से सांसद पद छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फलता में हार के बाद बढ़ी सियासी हलचल
बताया जा रहा है कि काकोली घोष के गढ़ माने जाने वाले फलता क्षेत्र में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसके बाद उनके संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस्तीफे के तुरंत बाद यह अटकलें भी शुरू हो गईं कि क्या काकोली घोष भाजपा में शामिल हो सकती हैं।
बेटे के बयान से बढ़ीं चर्चाएं
काकोली घोष के बेटे वैद्यनाथ घोष ने मीडिया से बातचीत में कई बड़े संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि उनकी मां ने टीएमसी महिला मोर्चा के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने यह भी इशारा किया कि उनकी मां सांसद पद भी छोड़ सकती हैं।
वैद्यनाथ घोष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की वजह से उनके परिवार की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यह कदम उठाया है।
‘भ्रष्टाचार से परेशान था परिवार’
काकोली घोष के बेटे ने कहा कि नौकरियों की बिक्री, राशन घोटाले और आरजी कर अस्पताल जैसी घटनाओं ने पूरे राज्य को शर्मसार किया है।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार शिक्षित और सम्मानित परिवारों में गिना जाता है और ऐसे माहौल को लगातार सहन करना आसान नहीं था।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी मां के ममता बनर्जी के साथ व्यक्तिगत संबंध अब भी अच्छे हैं।
केंद्र सरकार ने दी है Y श्रेणी सुरक्षा
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने सांसद काकोली घोष को Y श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
अब जिला पद से इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें और तेज हो गई हैं।
क्या टीएमसी को लग सकता है बड़ा झटका?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि काकोली घोष सांसद पद से भी इस्तीफा देती हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। फिलहाल सबकी नजर अब उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
