उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple से जुड़ी जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि महाकाल मंदिर क्षेत्र की पार्किंग के लिए उपयोग में आने वाली करीब 45 हजार स्क्वायर फीट जमीन का गलत तरीके से सौदा किया गया और बाद में उसे बीजेपी विधायक से जुड़ी कंपनी के नाम कर दिया गया।मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष लगातार सरकार और बीजेपी पर निशाना साध रहा है, जबकि विधायक ने पूरे आरोपों को साजिश करार दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
आरोपों के मुताबिक हरिफाटक क्षेत्र में स्थित जमीन पहले सरकारी और मंदिर पार्किंग उपयोग से जुड़ी बताई जा रही थी। दावा किया गया कि बाद में इस जमीन को निजी श्रेणी में परिवर्तित किया गया और फिर इसे एक निजी कंपनी के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।बताया जा रहा है कि इस भूमि पर अब होटल प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी चल रही है। जिस कंपनी का नाम सामने आया है, उसके डायरेक्टर्स में आलोट से बीजेपी विधायक Chintamani Malviya का भी नाम बताया जा रहा है।
बीजेपी विधायक बोले- मेरे खिलाफ रची जा रही राजनीतिक साजिश
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक चिंतामणि मालवीय ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह महाकाल मंदिर की पार्किंग की जमीन है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।उन्होंने कहा कि मंदिर की जमीन उस स्थान से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है और आसपास की पार्किंग व्यवस्था अलग है। विधायक के मुताबिक उनके पास 75 साल की सर्च रिपोर्ट और सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर रजिस्ट्री कराई गई है।उन्होंने बिना किसी का नाम लिए यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी उन्हें परेशान करने के लिए इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर सीधा हमला बोला है।उन्होंने दावा किया कि जिस जमीन का उपयोग मंदिर पार्किंग के रूप में किया जा रहा था, उसे पहले सरकारी रिकॉर्ड से निजी भूमि में बदला गया और बाद में उसे Utopia Hotel and Resort Private Limited को बेच दिया गया। उनका कहना है कि इस कंपनी का संबंध बीजेपी विधायक से है।
अब जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया पर टिकी नजर
मामला सामने आने के बाद उज्जैन की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इस मुद्दे को बड़ा भ्रष्टाचार और सरकारी जमीन के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहा है, जबकि बीजेपी विधायक इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं।अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
