देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फैक्ट्री में हुए जोरदार धमाके और आग की घटना में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। विस्फोट इतना भयावह था कि मृतकों के शरीर के टुकड़े सड़क तक बिखर गए।
अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की बड़ी विफलता सामने आती दिखाई दे रही है।
मार्च में भी लगी थी आग, फिर कैसे मिला लाइसेंस?
जांच में सामने आया है कि यह पहली बार नहीं था जब एबी रोड स्थित इस पटाखा फैक्ट्री में आग लगी हो। फैक्ट्री में काम करने वाले घायल मजदूरों ने बताया कि यहां पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी थीं।
14 मार्च को भी फैक्ट्री में आग लगी थी, जिसके बाद काम बंद कर दिया गया था। इस घटना के बाद कलमा गांव की सरपंच कविता गौड़ ने 16 मार्च को प्रशासन से शिकायत करते हुए कहा था कि पेट्रोल पंप के सामने बारूद फैक्ट्री चलाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
इसके बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और मई में फैक्ट्री का लाइसेंस दोबारा रिन्यू कर दिया गया।
पटवारी ने पहले ही दी थी खतरे की चेतावनी
इस मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। फैक्ट्री शुरू करने से पहले जिला प्रशासन ने पटवारी से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि फैक्ट्री घनी आबादी से करीब 500 मीटर और पेट्रोल पंप से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित होगी।
रिपोर्ट में इसे संभावित रूप से खतरनाक बताया गया था, लेकिन चेतावनी के बावजूद फैक्ट्री संचालन की अनुमति दे दी गई।
15 किलो लाइसेंस, अंदर मिला कई टन बारूद
जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री को केवल 15 किलो विस्फोटक रखने की अनुमति दी गई थी। लेकिन हादसे के समय परिसर में कई टन बारूद मौजूद होने की बात सामने आई है।
फैक्ट्री में करीब 600 मजदूर काम करते थे और सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
राजनीतिक संबंधों को लेकर भी उठे सवाल
हादसे के बाद फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। दावा किया जा रहा है कि वह बीजेपी सांसद Mahendra Singh Solanki के करीबी माने जाते हैं।
सोशल मीडिया पर आरोपी संचालक की तस्वीरें सांसद के साथ वायरल हो रही हैं, जिसके बाद विपक्ष भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहा है।
अब प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब पहले से आग की घटनाएं हो चुकी थीं, सरपंच ने शिकायत की थी और पटवारी ने खतरे की रिपोर्ट दी थी, तब आखिर फैक्ट्री को दोबारा संचालन की अनुमति कैसे मिली?
