मुरैना में अवैध खनन से दहशत! धमाकों से कांप रहे घर, मंदिर हटाने के आरोप से भड़के ग्रामीण

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मुरैना: जिले की बानमौर तहसील के ग्राम मलखानपुरा में अवैध खनन और लगातार हो रही ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। गांव में हो रहे तेज धमाकों से लोगों का जीवन डर और असुरक्षा के माहौल में गुजर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासकीय जमीन पर कब्जा कर बड़े पैमाने पर खनन और अवैध कॉलोनी निर्माण किया जा रहा है।लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

बिना अनुमति चल रहा खनन और कॉलोनी निर्माण?

ग्रामीणों के अनुसार सर्वे क्रमांक 10, 11, 23, 128, 129 और 170 हेक्टेयर क्षेत्र में बिना वैध अनुमति के खनन कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी T&CP की मंजूरी के बिना अवैध कॉलोनी भी विकसित की जा रही है।लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, लेकिन प्रशासन अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठा पाया है।

गांव के रास्ते बंद, मंदिर हटाने की कोशिश का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनन और निर्माण कार्य के चलते गांव के पारंपरिक रास्तों को बाधित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इलाके के एक मंदिर को हटाने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया गया है।इस मुद्दे को लेकर गांव में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और लोग खुलकर विरोध करने लगे हैं।

धमाकों से मकानों में पड़ रहीं दरारें

गांववासियों का कहना है कि खनन के लिए किए जा रहे लगातार ब्लास्ट से कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं। कुछ घरों की छतों को भी नुकसान पहुंचा है।लोगों का डर है कि यदि इसी तरह विस्फोट जारी रहे, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप

ग्रामीणों ने पास में संचालित एक इंडस्ट्री के संचालक पर इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।इसी वजह से लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों की बड़ी मांगें

गांव के लोगों ने प्रशासन से तत्काल अवैध खनन बंद कराने, ब्लास्टिंग पर रोक लगाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षा व मुआवजा देने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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