लोकसभा में परिसीमन आयोग को लेकर उठ रही शंकाओं और विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर देश में गलत नैरेटिव बनाया जा रहा है और इससे जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।
दक्षिण भारत को नुकसान के दावे गलत, अमित शाह ने पेश किए आंकड़े
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल की सीटों में वृद्धि होगी और उनका प्रतिनिधित्व भी बना रहेगा।
कर्नाटक से लेकर केरल तक सीटों का नया गणित
कर्नाटक में वर्तमान में 28 सीटें हैं, जो बढ़कर 42 हो सकती हैं और प्रतिशत लगभग समान रहेगा।
आंध्र प्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 38 हो जाएंगी और उसका प्रतिनिधित्व 4.60 प्रतिशत से बढ़कर 4.65 प्रतिशत होगा।
तेलंगाना में 17 सीटें बढ़कर 26 हो सकती हैं, जिससे प्रतिशत 3.13 से बढ़कर 3.18 हो जाएगा।
तमिलनाडु में 39 सीटें बढ़कर लगभग 59 हो सकती हैं और प्रतिशत 7.18 से 7.23 तक जाएगा।
केरल में 20 सीटें बढ़कर 30 हो जाएंगी, जबकि प्रतिशत लगभग स्थिर रहेगा।
दक्षिण भारत का कुल प्रतिनिधित्व लगभग समान रहेगा
अमित शाह ने बताया कि अभी दक्षिण भारत के इन राज्यों से 129 सांसद लोकसभा में हैं, जो कुल 23.76 प्रतिशत होता है। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 सांसदों तक पहुंच सकती है, जिससे उनका कुल प्रतिनिधित्व लगभग 23.94 प्रतिशत यानी करीब 24 प्रतिशत रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि दक्षिण भारत को नुकसान होने का दावा सही नहीं है।
‘नैरेटिव बनाकर भ्रम फैलाया जा रहा है’
गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन को लेकर एक बड़ा नैरेटिव खड़ा किया गया है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि दक्षिण भारत की राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी, जबकि वास्तविक आंकड़े इसके विपरीत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस विषय पर विस्तार से स्पष्टता देती रहेगी।
