नई दिल्ली में संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। इस बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन की प्रक्रिया है।
‘द हिंदू’ में लेख के जरिए सरकार पर निशाना
सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि सरकार विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन चाहती है, जिन्हें विशेष सत्र में जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है।
उनके अनुसार, सरकार विपक्ष को बचाव की स्थिति में लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
परिसीमन को बताया असली केंद्र बिंदु
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस पूरे मामले का वास्तविक मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन है। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पहले ही संसद से पारित हो चुका है, ऐसे में जनगणना और जरूरी प्रक्रियाओं के बिना इसे आगे बढ़ाने की जल्दबाजी सवाल खड़े करती है।
संघीय ढांचे पर असर की आशंका
सोनिया गांधी ने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन प्रक्रिया बिना संतुलन और तैयारी के आगे बढ़ाई जाती है, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित होने की आशंका उन्होंने जताई।
सरकार के फैसलों पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर कोई विरोध नहीं है, लेकिन इसे लागू करने के समय और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनके अनुसार, पहले इसे 2024 चुनाव से पहले लागू करने की चर्चा थी, जबकि अब 2029 का समय बताया जा रहा है, जो सरकार के रुख में बदलाव को दर्शाता है।
विशेष सत्र की टाइमिंग पर भी सवाल
सोनिया गांधी ने विशेष सत्र बुलाने के समय पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब देश के कई राज्यों में चुनावी माहौल चल रहा है, ऐसे समय में संसद का विशेष सत्र बुलाना राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित लग सकता है।
