छत्तीसगढ़ : संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्र Abujhmad में सुरक्षा बलों और ग्रामीणों की साझेदारी से विकास की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है। नारायणपुर और बस्तर सीमा क्षेत्र में यह पहल लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जहां लंबे समय से संपर्क की समस्या बनी हुई थी।
आईटीबीपी की पहल से बना 60 मीटर लंबा मजबूत पुल
Indo-Tibetan Border Police की 38वीं बटालियन ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से लगभग 60 मीटर लंबा लकड़ी और बांस का मजबूत पुल तैयार किया है। यह पुल ओरछा थाना क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर दूर कुड़मेल गांव के पास बनाया गया है, जिससे अब आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आसान हो गई है।
स्थानीय संसाधनों से बनी मजबूत संरचना, ग्रामीणों की भी बड़ी भागीदारी
इस निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। गांव वालों ने न केवल सामग्री उपलब्ध कराई बल्कि निर्माण में भी सहयोग दिया। यह कार्य सुरक्षा बल और ग्रामीण समुदाय के बीच मजबूत विश्वास और तालमेल का उदाहरण बनकर सामने आया है।
इतना मजबूत कि मोटरसाइकिल भी आसानी से गुजर सके
लकड़ी और बांस से बने इस पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह केवल पैदल चलने तक सीमित नहीं है। इसे इतना मजबूत बनाया गया है कि इस पर मोटरसाइकिल भी सुरक्षित रूप से गुजर सकती है, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो गई है।
उद्घाटन में दिखा सामूहिक उत्साह, अधिकारियों की मौजूदगी
पुल का लोकार्पण 38वीं बटालियन आईटीबीपी के कमांडेंट Roshan Singh Aswal और पुलिस अधीक्षक Robinson Guria की उपस्थिति में किया गया। इस मौके पर जवानों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या मौजूद रही, जिसने इस पहल को और भी खास बना दिया।
ग्रामीणों के लिए सालभर संपर्क की सुविधा, विकास की नई शुरुआत
इस पुल के बनने से अब ग्रामीणों को पूरे साल सुरक्षित और आसान संपर्क सुविधा मिलेगी। पहले जहां बरसात और दुर्गम रास्तों के कारण आवागमन मुश्किल होता था, अब वहां जीवन अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
सुरक्षा और विकास का मजबूत संदेश, एक प्रेरणादायक पहल
यह पहल केवल एक पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के बीच सहयोग, भरोसे और विकास की नई सोच को दर्शाती है। अबूझमाड़ जैसे कठिन क्षेत्र में यह प्रयास आने वाले समय में और विकास कार्यों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
