MP UCC: मध्य प्रदेश में जल्द लागू हो सकती है समान नागरिक संहिता, शादी, तलाक और लिव-इन संबंधों के नियमों में होंगे बड़े बदलाव

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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हालिया संकेतों के बाद माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र में सरकार यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पेश कर सकती है। इसके लिए प्रदेश सरकार जनता की राय भी जुटा रही है और मोबाइल संदेशों के जरिए लोगों से ‘हां’ या ‘ना’ में अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा जा रहा है।

चार प्रमुख विषयों पर तैयार हुआ यूसीसी का मसौदा

राज्य सरकार का प्रस्तावित यूसीसी कानून मुख्य रूप से चार अहम क्षेत्रों पर आधारित है। इनमें विवाह, तलाक एवं भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकार, तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान व्यवस्था लागू कर कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने यूसीसी का प्रारूप तैयार कर लिया है।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर विशेष प्रावधान

प्रस्तावित मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अधिकारों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव है। साथ ही उन्हें अपने माता-पिता की संपत्ति में जैविक उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार मिलने की व्यवस्था की गई है। यदि लिव-इन संबंध समाप्त होता है, तो महिला को आर्थिक सहायता का अधिकार भी देने का प्रावधान रखा गया है।

संपत्ति और तलाक के नियमों में समानता पर जोर

यूसीसी के प्रस्तावित ढांचे में महिला और पुरुष दोनों को संपत्ति पर समान अधिकार देने की बात कही गई है। इसके अलावा अलग-अलग धर्मों में लागू एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक संबंधी प्रावधानों को समाप्त करने की तैयारी है। मसौदे के अनुसार तलाक तभी वैध माना जाएगा, जब उसका विधिवत न्यायालय में पंजीकरण कराया जाएगा।

साथ ही तलाक के बाद भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) के नियम भी सभी समुदायों के लिए समान रखने का प्रस्ताव है, ताकि सभी नागरिकों पर एक जैसी कानूनी व्यवस्था लागू हो सके।

मानसून सत्र पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री मोहन यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार यूसीसी को लेकर अपने संकल्प पर कायम है। ऐसे में माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस महत्वपूर्ण विधेयक को विधानसभा में पेश किया जा सकता है। हालांकि, कानून का अंतिम स्वरूप विधेयक पेश होने और विधानसभा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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