नई दिल्ली : एक बड़ा कार्यक्रम सामने आया है, जहां नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात जा रहे हैं। इस दौरान वे हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, साथ ही धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
बेंगलुरु से शुरुआत, आध्यात्म और सेवा के संगम में देंगे संदेश
दौरे की शुरुआत कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से होगी, जहां प्रधानमंत्री द आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष समारोह में शामिल होंगे। यहां वे इंटरनेशनल सेंटर में बने नए ध्यान मंदिर का उद्घाटन करेंगे और मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े राष्ट्रीय सेवा अभियानों की शुरुआत करेंगे।
हैदराबाद में 9400 करोड़ की सौगात, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
इसके बाद प्रधानमंत्री हैदराबाद पहुंचेंगे, जहां करीब 9,400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सिंधु अस्पताल राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो कैंसर उपचार के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग और टेक्सटाइल पार्क से मिलेगा विकास को नया वेग
तेलंगाना में ही प्रधानमंत्री हैदराबाद-पणजी आर्थिक कॉरिडोर के तहत गुडेबेलूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-167 के चार लेन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही वारंगल में पीएम मित्र योजना के तहत विकसित काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन करेंगे, जिससे रोजगार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
सोमनाथ में आस्था का संगम, 75वीं वर्षगांठ पर विशेष आयोजन
11 मई को प्रधानमंत्री गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे और सोमनाथ अमृत महोत्सव में शामिल होंगे। यह आयोजन मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया जा रहा है। यहां वे महापूजा, कुम्भाभिषेक और ध्वजारोहण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे, साथ ही स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे।
वडोदरा में शिक्षा को बढ़ावा, छात्रावास परियोजना का उद्घाटन
गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री वडोदरा में सरदारधाम हॉस्टल का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना के तहत 1000 लड़कों और 1000 लड़कियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
विकास और विरासत का संतुलन, दौरे से कई संदेश
यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आध्यात्म, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे का संतुलन भी नजर आता है। एक ओर जहां देश को नई परियोजनाओं की सौगात मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त करने का संदेश दिया जाएगा।
