जबलपुर से स्वास्थ्य विभाग में बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन को हिला दिया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 1 करोड़ 74 लाख रुपये का भुगतान बिना किसी सामग्री की आपूर्ति के ही कर दिया गया। बताया जा रहा है कि 13 फर्जी बिलों के जरिए अलग अलग फर्मों को यह राशि ट्रांसफर की गई।
शिकायत के बाद जांच में खुली परतें
मामले की शिकायत मिलते ही विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी। 31 मार्च को जांच टीम जब सीएमएचओ कार्यालय पहुंची, तो रिकॉर्ड में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। दस्तावेजों में सामान की एंट्री दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक रूप से कोई सप्लाई नहीं हुई थी।
रिकॉर्ड में हेरफेर, कर्मचारियों पर भी शक
जांच के दौरान यह पाया गया कि रजिस्टर में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर सामग्री प्राप्त होने का दिखावा किया गया। इस पूरे मामले में विभाग के डीपीएम, स्टोर कीपर और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। विभाग अब सभी संबंधित लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रहा है।
सीएमएचओ पर गिरी गाज, तत्काल निलंबन
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हें भोपाल अटैच किया गया है।
घोटाले की रकम बढ़ने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल 1 करोड़ 74 लाख रुपये तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि जांच आगे बढ़ने पर घोटाले की राशि लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
