NEET री-एग्जाम का बढ़ता दबाव…48 घंटे में 3 छात्रों ने दी जान, देशभर में 14 मौतों से बढ़ी चिंता

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नीट यूजी री-एग्जाम को लेकर छात्रों में बढ़ती मानसिक चिंता अब गंभीर सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है। दोबारा परीक्षा की आशंका और भविष्य को लेकर बढ़ रहे तनाव के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों से आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 48 घंटों में तीन छात्रों की मौत की खबरों ने चिंता और गहरा दी है। बताया जा रहा है कि अब तक कुल 14 छात्रों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकांश मामलों को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।

तमिलनाडु की छात्रा ने उठाया आत्मघाती कदम

तमिलनाडु के कोयंबटूर की 19 वर्षीय नीट अभ्यर्थी अनुकीर्तना ने कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी। वह मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने और री-एग्जाम की संभावना से बेहद तनाव में थी। आत्महत्या से पहले उसने अपने चाचा और कुछ रिश्तेदारों को व्हाट्सएप संदेश भेजकर अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र किया।

आखिरी संदेश में बयां किया दर्द

परिजनों के अनुसार, छात्रा ने अपने संदेश में लिखा कि उसने नीट परीक्षा दी थी और अब मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा परीक्षा देने का डर उसे लगातार परेशान कर रहा था। उसने यह भी लिखा कि उसके पिता ने उसकी पढ़ाई पर काफी पैसा खर्च किया है और वह उन्हें निराश नहीं करना चाहती।

परिजन पहुंचे तो बंद मिला कमरा

व्हाट्सएप संदेश पढ़ने के बाद परिवार के लोग तुरंत घर पहुंचे। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर छात्रा अचेत अवस्था में मिली। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार ने उठाई कार्रवाई की मांग

घटना के बाद छात्रा के परिवार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। वहीं स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर मामले को लेकर नाराजगी जताई।

पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी बेचैनी

नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की खबरें सामने आने के बाद कई छात्रों में भविष्य को लेकर असमंजस और मानसिक दबाव बढ़ा है। इसी बीच री-एग्जाम को लेकर फैली अनिश्चितता ने अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ा दी है। सरकार का कहना है कि मामले में कार्रवाई जारी है और अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं प्रस्तावित पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित किए जाने की बात कही जा रही है।

अगर आप या आपका कोई परिचित परीक्षा के दबाव या मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद परिजन, शिक्षक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत बात करना बहुत महत्वपूर्ण है। समय पर सहयोग और बातचीत कई बार बड़ी कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद कर सकती है।

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