हाई कोर्ट का अहम फैसला: अवमानना मामले में संस्था नहीं, जिम्मेदार अधिकारी ही बनेंगे पक्षकार

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही किसी संस्था, प्राधिकरण या निगम के खिलाफ नहीं, बल्कि आदेश का पालन करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या अधिकारी के विरुद्ध ही संचालित की जा सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को पक्षकार बनाकर दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी।

न्यायालय ने दी कानूनी स्थिति की स्पष्ट व्याख्या

जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अवमानना की कार्यवाही मूल रूप से व्यक्तिगत प्रकृति की होती है। यदि किसी न्यायालयीन आदेश का पालन नहीं किया गया है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे, न कि वह संस्था या प्राधिकरण जिसके अंतर्गत वे कार्यरत हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत किसी निगम, प्राधिकरण या सरकारी निकाय पर सीधे मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

क्या था पूरा मामला

बिलासपुर निवासी अरविंद कुमार गोयल ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि 8 अक्टूबर 2024 को पारित न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्धारित 90 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई। इस आधार पर उन्होंने एनएचएआई समेत कई अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने रखी यह दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि अवमानना अधिनियम की धारा 12(5) और उससे जुड़े प्रावधानों के अनुसार एनएचएआई को भी इस मामले में आवश्यक पक्षकार माना जाना चाहिए, क्योंकि आदेश के पालन की जिम्मेदारी उसी संस्था की थी।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि किसी संस्था को दिया गया आदेश वास्तव में उसके जिम्मेदार अधिकारियों के माध्यम से लागू किया जाता है। ऐसे में यदि आदेश का पालन नहीं हुआ है तो संबंधित अधिकारी ही उत्तरदायी होंगे। इसलिए एनएचएआई जैसी संस्था को अवमानना कार्यवाही में पक्षकार बनाना विधिसम्मत नहीं है।

इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

नई याचिका दायर करने की दी छूट

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह स्वतंत्रता भी दी कि वह उन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाकर नई अवमानना याचिका दाखिल कर सकते हैं, जिन पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप है।

नियम 349 का भी किया उल्लेख

अदालत ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट नियम, 2007 के नियम 349 का उल्लेख करते हुए कहा कि अवमानना याचिका में स्पष्ट रूप से यह बताया जाना चाहिए कि अवमानना किस व्यक्ति ने की, किस तारीख को आदेश का उल्लंघन हुआ और उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज व शपथपत्र भी संलग्न होना चाहिए।

फैसले का व्यापक प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार हाई कोर्ट का यह निर्णय भविष्य में दायर होने वाली अवमानना याचिकाओं के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगा। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना के मामलों में संस्थाओं के बजाय उन अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी, जिन पर आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी होती है।

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