जबलपुर। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले में विकास की हकीकत आज भी सवालों के घेरे में है। यहां कई ऐसे गांव मौजूद हैं, जहां आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं पहुंच पाई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस गांव को पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने गोद लिया था, वहां भी हालात आज तक नहीं बदले हैं।
गोद लिए गांव में भी नहीं पहुंची पक्की सड़क
मामला शहपुरा विधानसभा क्षेत्र के दुनिया बघाड़ गांव का है, जहां ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव तक सड़क निर्माण को मंजूरी तो मिली, लेकिन सालों बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता वादे तो करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
इलाज के लिए भी संघर्ष कर रहे ग्रामीण
गांव की स्थिति इतनी खराब है कि यहां अगर कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस पहुंचना संभव नहीं है। मजबूरी में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया या डोली के सहारे करीब 10 किलोमीटर तक जंगल और कच्चे रास्तों से ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज न मिलने से गंभीर स्थिति भी बन जाती है।
करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरी सड़क
ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा इस क्षेत्र में विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन सड़क का काम अब भी अधूरा है। करीब दो साल पहले पीएम जनमन योजना के तहत लगभग 6 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन यह परियोजना भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
आदर्श गांव की सच्चाई पर उठे सवाल
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने इस गांव को आदर्श ग्राम के रूप में गोद लिया था, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सड़क निर्माण में हो रही देरी की जांच कराने और गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही है।
सबसे बड़ा सवाल, कब मिलेगा असली विकास
आज जब देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में डिंडोरी जैसे आदिवासी क्षेत्रों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का न पहुंच पाना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीण आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कभी तो उनके गांव तक विकास की असली रोशनी पहुंचेगी।
