दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल चुनाव में जूनियर वकीलों के लिए आरक्षण की मांग की खारिज

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दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनाव में सभी सीटों पर आरक्षण लागू करना संविधान और कानून के तहत संभव नहीं है। कोर्ट ने जूनियर वकीलों की यह मांग खारिज कर दी कि 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए छह सीटें आरक्षित की जाएँ।

क्या था मामला

जूनियर वकील रमेश चंद्र सिंह ने 2022 में BCD में पंजीकरण कराया था और फरवरी 2026 के चुनावों में हिस्सा लिया। उनका तर्क था कि 12 सीटें अनुभवी वकीलों (10 साल से अधिक अनुभव) के लिए और 5 सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, लेकिन शेष छह सीटों पर जूनियर वकीलों को आरक्षण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यह उनके संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

दो जजों की पीठ का फैसला

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने रमेश चंद्र सिंह की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सभी पदों पर पूर्ण आरक्षण लागू करना संवैधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 3(2)(b) के अनुसार 50% आरक्षण अनुभवी वकीलों के लिए और 30% महिला उम्मीदवारों के लिए तय है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बाकी 20% पद जूनियर वकीलों के लिए आरक्षित हैं।

संविधान और कानून के अनुरूप आरक्षण

कोर्ट ने यह भी कहा कि एडवोकेट्स एक्ट और भारतीय संविधान की सीमाओं के भीतर सभी पदों के लिए 100% आरक्षण की अनुमति नहीं है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आरक्षण नीति केवल संवैधानिक और नियमों के अनुसार लागू होगी, और सीटों का आवंटन वकीलों के अनुभव के आधार पर ही होगा।

एकल न्यायाधीश का फैसला भी सहमति योग्य

इससे पहले एकल न्यायाधीश ने भी याचिका खारिज की थी, जिसमें कहा गया कि 10 साल से अधिक अनुभव वाले वकीलों और महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण होने का अर्थ यह नहीं कि जूनियर वकीलों के लिए कोई निहित अधिकार बनता है। दो जजों की पीठ ने इस फैसले को बरकरार रखा।

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