गरियाबंद, 11 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य संकट को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। कभी सुपेबेड़ा गांव में किडनी रोगों को लेकर सुर्खियों में रहा यह क्षेत्र अब एक और नए गांव पथर्री को लेकर चर्चा में है, जहां हालात धीरे-धीरे चिंताजनक होते जा रहे हैं।
फिंगेश्वर क्षेत्र के पथर्री गांव में किडनी संबंधी बीमारियों के मामलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही मौतों और मरीजों की बढ़ती संख्या ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है।
बढ़ते मरीज और मौतों ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगभग 10 लोग किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। पिछले 2 से 3 वर्षों में 7 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जल स्रोतों की जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इसके बाद ग्रामीणों में यह आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं दूषित पानी ही बीमारी की मुख्य वजह तो नहीं है।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्थिति लगातार गंभीर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
स्वास्थ्य शिविर की मांग तेज
गांव के लोगों ने तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है। साथ ही प्रभावित मरीजों की जांच, उपचार और साफ पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
फिर दोहराता संकट का इतिहास
इस पूरे मामले ने सुपेबेड़ा जैसे पुराने संकट की यादें ताजा कर दी हैं। अब पथर्री गांव में सामने आ रहे मामले इस आशंका को मजबूत कर रहे हैं कि यह क्षेत्र एक बार फिर किडनी रोगों का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है।
