जनगणना में ओबीसी कॉलम पर उठा विवाद…आम आदमी पार्टी ने जताई कड़ी आपत्ति

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रायपुर : में आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने आगामी डिजिटल जनगणना के प्रारूप को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निर्धारित 33 बिंदुओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम का अभाव गंभीर चिंता का विषय है और यह सीधे तौर पर पिछड़े वर्ग की अनदेखी को दर्शाता है।

‘सरकार अपना रही दोहरा रवैया’

उत्तम जायसवाल ने केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछड़े समाज के विकास की बात करने वाली सरकारें इस मुद्दे पर असहाय क्यों दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। उनके अनुसार, राजपत्र के बिंदु क्रमांक 12 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन ओबीसी के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं की गई।

‘घोषणाओं और जमीनी हकीकत में अंतर’

उन्होंने कहा कि एक ओर जातिगत जनगणना की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी वर्ग को सूची से बाहर रखना विरोधाभासी है। जायसवाल ने सवाल किया कि बिना अलग कॉलम के इस वर्ग की वास्तविक संख्या कैसे सामने आएगी। उन्होंने इसे पिछड़े वर्ग के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश बताया।

समाज में बढ़ता असंतोष

इस मुद्दे को लेकर राज्य में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। सर्व छत्तीसगढ़िया समाज एससी एसटी ओबीसी महासंघ ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया है। इससे स्पष्ट है कि जनगणना के इस प्रारूप को लेकर व्यापक असंतोष पनप रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए पृथक कॉलम शामिल नहीं किया गया, तो प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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