बदलते टोल, फ्री सफर और हाईटेक सुविधाएं… गंगा एक्सप्रेसवे पर क्यों बना कन्फ्यूजन का माहौल?

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उत्तर प्रदेश : सबसे लंबे एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर इन दिनों जितनी चर्चा उसकी रफ्तार की है, उतनी ही उलझन टोल दरों को लेकर भी सामने आ रही है। उद्घाटन के साथ जहां इसे प्रदेश के विकास की बड़ी उपलब्धि बताया गया, वहीं टोल नीति में लगातार बदलाव ने यात्रियों को हैरान कर दिया है।


उद्घाटन के बाद बड़ा फैसला: 15 दिन तक फ्री सफर

29 अप्रैल को नरेंद्र मोदी ने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया। शुरुआत में 30 अप्रैल से टोल वसूली की तैयारी थी, लेकिन सरकार ने मजदूर दिवस के मौके पर बड़ा फैसला लेते हुए 15 दिनों तक इस एक्सप्रेसवे पर यात्रा को पूरी तरह निशुल्क कर दिया। यानी फिलहाल यात्री बिना किसी शुल्क के इस हाईटेक सड़क पर सफर कर सकते हैं।


तीन दिन में तीन बार बदले टोल रेट, क्यों बढ़ी उलझन

एक्सप्रेसवे के टोल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी बदलती दरों को लेकर है।

  • पहले तय दर: हल्के वाहनों के लिए लगभग 1514 रुपये
  • उद्घाटन के दिन संशोधन: बढ़ाकर करीब 1800 रुपये
  • अगले ही दिन फिर बदलाव: घटाकर लगभग 1765 रुपये

लगातार तीन दिन में तीन अलग-अलग दरें सामने आने से लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई। यह बदलाव उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से किए गए, जिससे टोल स्ट्रक्चर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


सफर में क्रांति: 594 किमी सिर्फ 6–7 घंटे में

यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा है। पहले जहां इस दूरी को तय करने में 12 से 14 घंटे लगते थे, अब वही सफर सिर्फ 6 से 7 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

हाईटेक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और तेज रफ्तार के चलते यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास में गेमचेंजर माना जा रहा है।


हाईटेक सुविधाएं, लेकिन महंगा पड़ सकता है सफर

एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है, लेकिन इसके साथ ही टोल दरें भी अपेक्षाकृत ज्यादा रखी जा रही हैं। यही वजह है कि जहां एक तरफ लोग इसकी सुविधाओं से प्रभावित हैं, वहीं दूसरी ओर संभावित महंगे टोल को लेकर चिंता भी जताई जा रही है।

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