छत्तीसगढ़ : के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने अंबिकापुर में मीडिया से बातचीत के दौरान नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सीमा में अब नक्सलियों का कोई संगठित हथियारबंद दल सक्रिय नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ लोग हथियार छोड़ने के बाद अलग अलग इलाकों में छिपे हुए हैं।
समीक्षा बैठक के बाद प्रेस वार्ता में खुलासा
सरगुजा संभाग के पुलिस कार्यों की समीक्षा के लिए पहुंचे डीजीपी ने बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के चलते नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ चुका है और अब कोई संगठित सशस्त्र समूह शेष नहीं बचा है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
पुलिस भर्ती में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने साफ कहा कि विभाग पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया ईमानदार नहीं होगी, तो पुलिसिंग की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गलत तरीके से भर्ती हुए व्यक्ति से निष्पक्ष कार्य की उम्मीद करना मुश्किल होता है।
अफीम की खेती में बाहरी लोगों की भूमिका
अफीम की अवैध खेती को लेकर डीजीपी ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि कुछ बाहरी राज्यों के लोग आदिवासी क्षेत्रों की जमीन का उपयोग कर रहे थे। इस खेती का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ कमाना था, जिस पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।
ड्रग्स की बढ़ती मांग बनी चुनौती
गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन नशे की बढ़ती मांग बड़ी समस्या बनती जा रही है। जब तक मांग पर नियंत्रण नहीं होगा, तस्कर नए रास्ते तलाशते रहेंगे। उन्होंने समाज से भी इस समस्या के समाधान में सहयोग की अपील की।
वेतन और भत्तों पर दिया स्पष्टीकरण
पुलिस कर्मियों के वेतन और भत्तों को लेकर उठे सवालों पर डीजीपी ने कहा कि प्रदेश में जवानों को पर्याप्त वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में अतिरिक्त भत्तों की मांग को उन्होंने आवश्यक नहीं बताया।
